राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women - NCW)
1.परिचय (Introduction):
राष्ट्रीय महिला आयोग भारत सरकार का एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है। इसका गठन भारतीय संविधान के तहत महिलाओं के हितों की रक्षा करने, उनके कानूनी अधिकारों को सुनिश्चित करने और उनके खिलाफ होने वाले भेदभाव और अत्याचारों को रोकने के उद्देश्य से किया गया है। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्था है।
2.स्थापना (Establishment):
● राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थापना राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 (National Commission for Women Act, 1990) के तहत की गई थी।
● राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन 31 जनवरी 1992 को हुआ है।
● पहली अध्यक्ष श्रीमती जयंती पटनायक थीं।
● वर्तमान अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर (19 अक्टूबर 2024 )
3.उद्देश्य (Objectives):
● संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों की समीक्षा करना: महिलाओं के लिए संविधान और अन्य कानूनों के तहत प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों की जांच और समीक्षा करना।
● विधायी उपायों की सिफारिश करना: महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन या नए कानूनों को बनाने की सिफारिश करना।
● शिकायतों का निवारण: महिलाओं के अधिकारों के उल्लंघन, भेदभाव और अत्याचार से संबंधित शिकायतों को सुनना और उचित कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करना।
● नीतिगत मामलों पर सरकार को सलाह देना: महिलाओं को प्रभावित करने वाले सभी प्रमुख नीतिगत मामलों पर केंद्र सरकार को सलाह देना।
● महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना: महिलाओं के विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेना और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने के उपाय सुझाना।
● जागरूकता बढ़ाना: महिलाओं को उनके अधिकारों और कानूनों के बारे में जागरूक करना।
4.संरचना (Structure):
● एक अध्यक्ष (Chairperson): केंद्र सरकार द्वारा नामित, (जो महिलाओं के हितों के लिए प्रतिबद्ध हो)।
● पांच सदस्य (Five Members): केंद्र सरकार द्वारा नामित, (जिन्हें कानून, ट्रेड यूनियनवाद, महिलाओं के उद्योग/प्रबंधन, महिला स्वयंसेवी संगठन, प्रशासन, आर्थिक विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा या समाज कल्याण जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल हो।
🠊इन सदस्यों में कम से कम एक अनुसूचित जाति (SC) और एक अनुसूचित जनजाति (ST) से होना अनिवार्य है)।
5.कार्य एवं शक्तियाँ (Functions and Powers):
आयोग के प्रमुख कार्य और शक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
● जांच और पड़ताल: महिलाओं के लिए संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जांच और पड़ताल करना।
● रिपोर्ट प्रस्तुत करना: इन सुरक्षा उपायों के कामकाज पर वार्षिक या आवश्यकतानुसार रिपोर्ट केंद्र सरकार को प्रस्तुत करना।
● सिफारिशें करना: संघ या किसी राज्य द्वारा महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए सुरक्षा उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सिफारिशें करना।
● कानूनों की समीक्षा: समय-समय पर महिलाओं से संबंधित संवैधानिक और अन्य कानूनों के प्रावधानों की समीक्षा करना और उनमें संशोधन की सिफारिश करना।
● अधिकारों के उल्लंघन के मामलों को उठाना: महिलाओं के अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों को उपयुक्त प्राधिकारियों के समक्ष उठाना।
● शिकायतें देखना: उन शिकायतों को देखना और स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेना जहां: महिलाओं के अधिकारों का हनन हुआ हो,महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों का पालन न हुआ हो,महिलाओं की समानता और विकास के उद्देश्य से बनी नीतियों का पालन न हुआ हो।
● अनुसंधान (Research): महिलाओं से संबंधित मुद्दों, विशेष रूप से उनके सामने आने वाली बाधाओं पर अनुसंधान करना।
● नियोजन प्रक्रिया में भागीदारी: महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास की नियोजन प्रक्रिया में भाग लेना और सलाह देना।
● विकास का मूल्यांकन: संघ और किसी भी राज्य के तहत महिलाओं के विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना।
● सिविल कोर्ट की शक्तियाँ: आयोग को किसी भी मामले की जांच करते समय सिविल कोर्ट की शक्तियाँ प्राप्त होती हैं, जैसे:
🠊भारत के किसी भी हिस्से से किसी भी व्यक्ति को समन जारी करना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उसकी जांच करना।
🠊किसी भी दस्तावेज़ को खोजने और प्रस्तुत करने की आवश्यकता।
🠊शपथ पत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना।
🠊किसी भी सार्वजनिक रिकॉर्ड या उसकी प्रति की मांग करना।
🠊गवाहों और दस्तावेजों की जांच के लिए कमीशन जारी करना।
6.अन्य महत्वपूर्ण बिंदु -
● राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन - 31 जनवरी 1992 (05 अध्याय व 17 धाराएँ)
● मुख्यालय -नई दिल्ली
● नोडल मंत्रालय -महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
● UNO द्वारा अंतरष्ट्रीय महिला वर्ष घोषित -1992
● कार्यकाल - 3 वर्ष या 65 वर्ष (अध्यक्ष व सदस्य)
● अध्यक्ष एवं सदस्य त्यागपत्र -केंद्र सरकार
● अध्यक्ष सदस्य का वेतन भत्ता ,पदावधि,सेवासर्ते का निर्धारण -केंद्र सरकार
● राष्ट्रीय महिला आयोग दिवस - 13 फरवरी
● राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम 1990
● कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013
🠊महिला आयोगों को प्रायः वित्तीय बाधाओं का सामना करना पड़ता है। वे सरकारी वित्तपोषण पर बहुत अधिक निर्भर होते हैं, जो उनकी स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है तथा प्रभावी ढंग से कार्य कर सकने की उनकी क्षमता को बाधित कर सकता है।
राष्ट्रीय महिला आयोग भारत में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण संस्था है। यह महिलाओं के खिलाफ होने वाले अन्याय के विरुद्ध एक आवाज के रूप में कार्य करता है और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यद्यपि इसकी कुछ सीमाएं हैं, फिर भी यह देश में लैंगिक समानता और न्याय को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।

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