इतिहास:
● खजुराहो हिंदू(शैव और वैष्णव) व जैन मंदिरों का समूह है, जो मध्य प्रदेश के छतरपुर ज़िले में विंध्य पर्वत शृंखला पर अवस्थित हैं। इतिहास मे इन मंदिरों का सर्वप्रथम लिखित उल्लेख अबू-रिहान-अल-बरूनी तथा अफ्रीकी यात्री इब्नबतूता के विवरणों में मिलता है।
● इन मंदिरों का निर्माण 950-1050 ईस्वी के मध्य चंदेल शासकों ने कराया था। गुप्तकाल के दौरान तराशे हुए पाषाण खंडों से मंदिर निर्माण की जो कला आरंभ हुई थी, वह चंदेलों के शासनकाल में अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँची। इस दौरान मंदिरों के निर्माण के लिये चिनाई पद्धति का प्रयोग किया जाने लगा था।
● खजुराहो के मंदिर वास्तुकला के ‘नागर शैली’ का अद्भुत उदाहरण हैं। गर्भगृह, शिखर (वक्रीय बुर्ज) और मंडप (प्रवेश द्वार) नागर शैली की प्रमुख विशेषताएँ हैं। सामान्य रूप से यहां के मंदिर बलुआ पत्थर से निर्मित किय गए हैं, लेकिन चौंसठ योगिनी, ब्रम्हा तथा लालगुआ महादेव मंदिर ग्रेनाइट से निर्मित है
● ऐतिहासिक अभिलेखों में दावा किया गया हैं कि 12 वीं सदी के दौरान लगभग 20 कि.मी. में फैले इन मंदिरों की संख्या 85 थी। इनमें से अधिकांश मंदिर नष्ट हो गए हैं तथा वर्तमान में इनकी संख्या लगभग 20-25 है।
● खजुराहो के मंदिर पश्चिमी, पूर्वी तथा दक्षिणी समूह में विभाजित हैं। इनमें पश्चिमी समूह के मंदिर शैव एवं वैष्णव संप्रदाय से संबंधित हैं। इन मंदिरों में चौंसठ योगिनी मंदिर, कंदरिया महादेव मंदिर, चित्रगुप्त मंदिर, देवी जगदंबा मंदिर, नंदी मंदिर, लक्ष्मण मंदिर (विष्णु् मंदिर), वराह मंदिर आदि प्रमुख हैं।
● पूर्वी समूह के मंदिर हिंदू व जैन संप्रदायों से संबंधित हैं। इसमें ब्रह्मा, वामन, आदिनाथ, पार्श्वनाथ तथा घंटाई मंदिर प्रमुख है। इसके अलावा, दुलादेव (शैव संप्रदाय) तथा जटकारी (वैष्णव संप्रदाय) मंदिर दक्षिणी समूह से संबंधित हैं।
खजुराहो से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी :-
● खोज -1838 में टी.एस.बर्ट
● संस्थापक- चन्द्रवर्मन
● यूनेस्को द्वारा वर्ष 1986 में ‘विश्व धरोहर स्थल’ का दर्जा प्रदान किया गया था। (कंदरिया महादेव मंदिर के कारण)
● प्रसिद्ध का कारण -कामुक्ता शैली या कामवासना शैली ,मप्र का प्रथम शिल्पग्राम ,मप्र का प्रथम हीरा संग्रहालय ,प्रथम यूनिस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल (1986),आदिवासी कला संग्रहालय ,एशिया का सबसे बड़ा पनीर संयंत्र ,
● आक्रमण -खजुराहो पर प्रथम मध्यकालीन आक्रमण गजनवी वंश के शासक मोहम्मद गजनवी के द्वारा किया गया था इस समय चंदेल वंश का शासक विद्याधर था ,जो युध्य में पराजित हो जाता है परन्तु गजनवी जीते हुए किले को वापस लौटा देता है और विद्याधर को महँ शासक के रूप में उल्लेखित करता है
● निमाड़ का खजुराहो ऊन (खरगोन) को कहा जाता ,छोटा खजुराहो सोमेश्वर महादेव मंदिरको कहा जाता है,
● खजुराहो का उल्लेख -इब्नबतूता(मोहम्मद बिन तुकलाक) ,अलबरूनी (गजनवी),हेनसांग(हर्षवर्धन)
● अलबरूनी ने खजुराहो को जेजाकभुक्ति ,इब्नबतूता ने काजरा ,हेनसांग ने ती -ति -ची कहा है
● खजुराहो नृत्य समारोह -1975 (मप्र पर्यटन अकादमी ,मप्र संस्कृत अकादमी ,उस्ताद अलाउद्दीन खा अकादमी इन तीनो के संगठन से प्रयास से खजुराहो में खजुराहो नृत्य समारोह का आयोजन किया जाता है)
● खजुराहो में छत्रसाल हवाई अड्डा ,वायुयान अकादमी (2021) ,यहाँ पर पर्यटन ट्रैन रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स चलाई गयी है
● खजुराहो मंदिरो का निर्माता -राजा धंग को कहा जाता हैं
खजुराहो के महत्वपूर्ण मंदिर
● पूर्वी समूह: इस समूह में जैन मंदिर और कुछ हिंदू मंदिर शामिल हैं।
● दक्षिणी समूह: इस समूह में दूल्हादेव मंदिर और चतुर्भुज मंदिर जैसे मंदिर शामिल हैं।
प्रमुख मंदिर:
● कंदरिया महादेव मंदिर: यह खजुराहो का सबसे बड़ा और सबसे अलंकृत मंदिर है। यह भगवान शिव को समर्पित है और अपनी उत्कृष्ट नक्काशी और जटिल मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है।
● लक्ष्मण मंदिर: यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और अपनी त्रिमुखी विष्णु प्रतिमा के लिए जाना जाता है। मंदिर की दीवारों पर विभिन्न देवताओं, अप्सराओं और दैनिक जीवन के दृश्यों को दर्शाया गया है।
● विश्वनाथ मंदिर: यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और अपनी विशाल शिवलिंग और सुंदर नंदी प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है।
● चौंसठ योगिनी मंदिर: यह खजुराहो का सबसे पुराना मंदिर है और यह 64 योगिनियों को समर्पित है। यह एक आयताकार मंदिर है और इसमें कोई शिखर नहीं है।
● पार्वती मंदिर: यह मंदिर भगवान शिव की पत्नी पार्वती को समर्पित है और अपनी सुंदर प्रतिमा के लिए जाना जाता है।


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