1. निर्वाचन मंडल (Electoral College)
राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं किया जाता है। उनका चुनाव एक निर्वाचन मंडल के सदस्यों द्वारा किया जाता है। इस निर्वाचन मंडल में निम्नलिखित सदस्य होते हैं: संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के निर्वाचित सदस्य। राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य। केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली और पुडुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।
2.संबंधित संवैधानिक प्रावधानअनुच्छेद 52: भारत का एक राष्ट्रपति होगा।
अनुच्छेद 53: संघ की कार्यकारी शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी। अनुच्छेद 54: राष्ट्रपति का चुनाव निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाएगा। अनुच्छेद 55: राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया। अनुच्छेद 56: राष्ट्रपति का कार्यकाल। अनुच्छेद 57: पुन: चुनाव के लिए पात्रता। अनुच्छेद 58: राष्ट्रपति पद के लिए योग्यताएं। अनुच्छेद 59: राष्ट्रपति के पद की शर्तें। अनुच्छेद 60: राष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान। अनुच्छेद 61: राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया। अनुच्छेद 62: राष्ट्रपति पद में रिक्ति को भरने का समय और चुनाव। अनुच्छेद 72: राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति। अनुच्छेद 74: राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद। अनुच्छेद 78: राष्ट्रपति को जानकारी देने आदि के संबंध में प्रधानमंत्री के कर्तव्य। अनुच्छेद 85: राष्ट्रपति द्वारा संसद के सत्र बुलाने, सत्रावसान करने और लोकसभा को भंग करने की शक्ति। अनुच्छेद 111: राष्ट्रपति की विधेयकों पर अनुमति। अनुच्छेद 123: राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति। अनुच्छेद 143: सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति।
राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को कम से कम 50 निर्वाचकों द्वारा प्रस्तावक के रूप में और 50 निर्वाचकों द्वारा समर्थक के रूप में नामित किया जाना चाहिए। प्रत्येक उम्मीदवार को भारतीय रिजर्व बैंक में 15,000 रुपये की जमानत राशि जमा करनी होती है। ।
नोट :- एक मतदाता एक से अधिक उम्मीदवारों के नामांकन का प्रस्ताव या समर्थन नहीं कर सकता है
राष्ट्रपति चुनाव में मतदान गुप्त मतदान द्वारा होता है। निर्वाचन मंडल के सदस्य आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) का उपयोग करके मतदान करते हैं। इसका मतलब है कि मतदाता उम्मीदवारों को वरीयता क्रम में चिह्नित करते हैं।
प्रत्येक निर्वाचक के मत का मूल्य अलग-अलग होता है, जो राज्य की जनसंख्या और विधानसभा के सदस्यों की संख्या पर निर्भर करता है। मतों की गणना एक विशेष सूत्र का उपयोग करके की जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि राज्यों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व मिले। पहला वरीयता मतों की गिनती की जाती है। यदि किसी उम्मीदवार को मतों का आवश्यक कोटा (कुल मतों का 50% + 1) प्राप्त होता है, तो उसे राष्ट्रपति घोषित कर दिया जाता है। यदि पहले दौर में किसी भी उम्मीदवार को आवश्यक कोटा प्राप्त नहीं होता है, तो सबसे कम मत पाने वाले उम्मीदवार को दौड़ से हटा दिया जाता है और उसके दूसरे वरीयता मतों को अन्य उम्मीदवारों में स्थानांतरित कर दिया जाता है। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक कि किसी उम्मीदवार को आवश्यक कोटा प्राप्त नहीं हो जाता।
यदि राष्ट्रपति चुनाव में कोई विवाद होता है, तो इसका निपटारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किया जाता है।
7.राष्ट्रपति पर महाभियोगआरोप: राष्ट्रपति पर महाभियोग का आरोप संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में लगाया जा सकता है। आरोप एक प्रस्ताव के रूप में पेश किया जाता है, जिस पर सदन के कम से कम एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए।
आरोप का आधार: महाभियोग का आरोप केवल संविधान के उल्लंघन के आधार पर ही लगाया जा सकता है। जांच: जब किसी सदन में महाभियोग का प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो दूसरा सदन आरोपों की जांच करता है। राष्ट्रपति को इस जांच में अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है। पारित: यदि दूसरा सदन भी आरोपों को सही पाता है और दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित कर देता है, तो राष्ट्रपति को पद से हटा दिया जाता है।
महत्वपूर्ण बातें: भारत में अभी तक किसी भी राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं चलाया गया है। महाभियोग एक जटिल और लंबी प्रक्रिया है, जिसके लिए संसद के दोनों सदनों में महत्वपूर्ण बहुमत की आवश्यकता होती है। महाभियोग प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रपति को अधिकृत वकील के माध्यम से अपना बचाव करने का अधिकार है। वह अपना बचाव करने का विकल्प चुन सकता है या ऐसा करने के लिये भारत के किसी वकील या अटार्नी जनरल को नियुक्त कर सकता है।

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