Thursday, April 17, 2025

नीति आयोग (NITI Aayog)

                                                       नीति आयोग (NITI Aayog)           

1.परिचय एवं पृष्ठ्भूमि 

नीति आयोग (NITI Aayog), जिसका पूरा नाम नेशनल इंस्टिट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (National Institution for Transforming India) यानी राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान है, भारत सरकार द्वारा गठित एक प्रमुख नीतिगत 'थिंक टैंक' (Think Tank) है।

● भारत सरकार ने मार्च 1950 में केंद्र सरकार द्वारा तैयार की गई पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से राष्ट्र की आर्थिक रणनीति की देखरेख के लिए योजना आयोग की स्थापना की थी।
➤यह आयोग शुरुआती वर्षों में प्रभावी रहा। यद्यपि, समय के साथ, इस पर बहुत अधिक केंद्रीयकृत होने तथा भारत के राज्यों की विविध आवश्यकताओं और बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को पर्याप्त रूप से प्रतिबिंबित नहीं करने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा।

● इसलिए केंद्र सरकार ने 13 अगस्त 2014 को तत्कालीन योजना आयोग को समाप्त कर दिया।

● पूर्ववर्ती योजना आयोग के स्थान पर, 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग नामक एक नई संस्था की स्थापना की गई। योजना आयोग के समान, नीति आयोग की स्थापना भारत सरकार के एक कार्यकारी संकल्प द्वारा की गई थी।

● इस प्रकार, नीति आयोग न तो संवैधानिक निकाय है (अर्थात संविधान द्वारा निर्मित नहीं) और न ही सांविधिक निकाय है

                                                                  


2.स्थापना का उद्देश्य

योजना आयोग की स्थापना 1950 में हुई थी और यह मुख्य रूप से पंचवर्षीय योजनाएँ बनाने और राज्यों को वित्तीय संसाधन आवंटित करने का कार्य करता था। समय के साथ, यह महसूस किया गया कि एक केंद्रीकृत योजना प्रणाली बदलते भारत की जटिल आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। राज्यों की भूमिका को अधिक महत्व देने और विकास प्रक्रिया में उन्हें बराबर का भागीदार बनाने की आवश्यकता महसूस हुई। इसी पृष्ठभूमि में, सरकार ने योजना आयोग को समाप्त कर नीति आयोग की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य है:

● सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देना, जहाँ केंद्र और राज्य मिलकर नीतियां बनाएं और उन्हें लागू करें।

● सरकार को नीतिगत और तकनीकी सलाह प्रदान करना।

● विकास के लिए एक दीर्घकालिक, रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाना।

3.नीति आयोग के मुख्य उद्देश्य

साझा दृष्टिकोण विकसित करना: राज्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं, क्षेत्रों और रणनीतियों का एक साझा दृष्टिकोण विकसित करना।
सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना: मजबूत राष्ट्र के निर्माण के लिए राज्यों को निरंतर आधार पर संरचित समर्थन पहलों और तंत्रों के माध्यम से सहयोग देना।
ग्राम स्तर पर योजना: ग्राम स्तर पर विश्वसनीय योजनाएँ बनाने के लिए तंत्र विकसित करना और इन्हें सरकार के उच्च स्तरों तक उत्तरोत्तर एकत्रित करना (बॉटम-अप अप्रोच)।
राष्ट्रीय सुरक्षा: यह सुनिश्चित करना कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को आर्थिक रणनीति और नीति में शामिल किया जाए।
वंचित वर्गों पर ध्यान: समाज के उन वर्गों पर विशेष ध्यान देना जिन्हें आर्थिक प्रगति से पर्याप्त रूप से लाभ नहीं मिल पाया है।
रणनीतिक और दीर्घकालिक नीतियां: प्रमुख हितधारकों, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय थिंक टैंक जैसे शैक्षिक और नीति अनुसंधान संस्थानों के बीच भागीदारी को प्रोत्साहित करना तथा रणनीतिक और दीर्घकालिक नीति व कार्यक्रम के ढांचे तैयार करना।
ज्ञान, नवाचार और उद्यमिता: एक ज्ञान, नवाचार और उद्यमशीलता समर्थन प्रणाली बनाना।
अत्याधुनिक संसाधन केंद्र: सुशासन और सतत व न्यायसंगत विकास में सर्वोत्तम प्रथाओं पर शोध करने वाले एक अत्याधुनिक संसाधन केंद्र के रूप में कार्य करना।
निगरानी और मूल्यांकन: कार्यक्रमों और पहलों के कार्यान्वयन की सक्रिय रूप से निगरानी और मूल्यांकन करना।
क्षमता निर्माण: प्रौद्योगिकी उन्नयन और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना।

4.नीति आयोग के कार्य (Functions):

नीति आयोग मुख्य रूप से चार तरह के कार्य करता है:

● नीति और कार्यक्रम का ढाँचा तैयार करना (Policy and Programme Framework): केंद्र और राज्यों के लिए रणनीतिक और दीर्घकालिक नीतियों और कार्यक्रमों का ढाँचा तैयार करना और आवश्यक सलाह देना।
● सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना (Fostering Cooperative Federalism): राज्यों के साथ मिलकर काम करना, उनकी समस्याओं को समझना और समाधान निकालना। अंतर-राज्यीय और केंद्र-राज्य समन्वय स्थापित करना।
● निगरानी और मूल्यांकन (Monitoring and Evaluation): सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति की निगरानी करना और उनका मूल्यांकन कर सुधार के लिए सुझाव देना।
● ज्ञान और नवाचार हब (Knowledge and Innovation Hub): नवीनतम ज्ञान, अनुसंधान और सर्वोत्तम प्रथाओं को एकत्रित कर सरकार के विभिन्न स्तरों तक पहुँचाना। नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना।

5.नीति आयोग की संरचना (Structure):

अध्यक्ष (Chairperson): भारत के प्रधानमंत्री (पदेन अध्यक्ष)।
उपाध्यक्ष (Vice-Chairperson): प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त। इन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है।
संचालन परिषद / शासी परिषद (Governing Council): इसमें सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों (जहाँ विधानसभा है) के मुख्यमंत्री तथा अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होते हैं।
क्षेत्रीय परिषदें (Regional Councils): विशिष्ट क्षेत्रीय मुद्दों को संबोधित करने के लिए आवश्यकतानुसार गठित की जाती हैं। इनमें संबंधित क्षेत्र के राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होते हैं। इनकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री या उनके द्वारा नामित व्यक्ति करते हैं।
पूर्णकालिक सदस्य (Full-time Members): विषय विशेषज्ञ होते हैं, जिन्हें राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त होता है।
अंशकालिक सदस्य (Part-time Members): अग्रणी विश्वविद्यालयों, शोध संगठनों और अन्य प्रासंगिक संस्थानों से अधिकतम दो पदेन सदस्य।
पदेन सदस्य (Ex-officio Members): केंद्रीय मंत्रिपरिषद से अधिकतम चार सदस्य, जिन्हें प्रधानमंत्री द्वारा नामित किया जाता है।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer - CEO): भारत सरकार के सचिव स्तर का अधिकारी, जिसे एक निश्चित कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त किया जाता है। वह आयोग के प्रशासनिक प्रमुख होते हैं।
विशेष आमंत्रित सदस्य (Special Invitees): प्रधानमंत्री द्वारा नामित विशेषज्ञ, विशेष ज्ञान वाले पेशेवर।

6.नीति आयोग का कार्यात्मक ढांचा

नीति आयोग के कार्यात्मक ढांचे को निम्न प्रकार से समझा जा सकता है:

नीति आयोग के दो प्रमुख केंद्र (Two Hubs of NITI Aayog)

नीति आयोग की समस्त गतिविधियों को दो मुख्य केंद्रों में विभाजित किया गया है:

1.टीम इंडिया हब (Team India Hub)
● टीम इंडिया हब सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने तथा नीति एवं कार्यक्रम ढांचे को तैयार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
● यह राज्यों के साथ नीति आयोग के सहयोग में आवश्यक समन्वय और सहायता प्रदान करता है।

2.ज्ञान और नवाचार हब (Knowledge and Innovation Hub)
नीति आयोग के ज्ञान और नवाचार हब की प्रमुख भूमिकाएँ निम्नलिखित हैं:
● अत्याधुनिक संसाधन केंद्र बनाए रखना।
● सुशासन और सर्वोत्तम प्रथाओं पर अनुसंधान के भंडार को बनाए रखना।
● महत्त्वपूर्ण मामलों पर सलाह देना।
● घरेलू और विदेश में कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, थिंक टैंकों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) सहित प्रमुख हितधारकों के साथ साझेदारी को प्रोत्साहित करना।

7.नीति आयोग के मार्गदर्शक सिद्धांत

अपने विभिन्न कार्यों को करने में, नीति आयोग निम्नलिखित सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होता है:

अंत्योदय (Antyodaya): पंडित दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदय‘ के विचार के अनुसार, निर्धनों, हाशिए पर रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की सेवा और उत्थान को प्राथमिकता देनी चाहिए।
● समावेश (Inclusion): लिंग, क्षेत्र, धर्म, जाति या वर्ग के आधार पर पहचान-आधारित असमानताओं को दूर करते हुए, कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों को सशक्त बनाना चाहिए।
● ग्राम (Village): सभी गांवों को विकास प्रक्रिया में एकीकृत करना, तथा हमारे लोकाचार, संस्कृति और जीविका के आधार की जीवंतता और ऊर्जा को बनाए रखना।
● जनसांख्यिक लाभांश (Demographic Dividend): शिक्षा और कौशल के माध्यम से उनके विकास, और उत्पादक आजीविका के अवसरों के माध्यम से उनके सशक्तिकरण पर फोकस करना, तथा हमारी सबसे बड़ी संपत्ति – भारत के कार्यशील जनसँख्या का उपयोग करना।
● जनभागीदारी (People’s Participation): विकास प्रक्रिया को जन-संचालित प्रक्रिया में परिवर्तित करना तथा सजग और सहभागी नागरिकता को सुशासन का संचालक बनाना।
● सुशासन (Governance): पारदर्शी, जवाबदेह, सक्रिय और सार्थक गवर्नेंस को प्रोत्साहित करना।
● स्थायित्व (Sustainability): पर्यावरण का सम्मान करने वाली हमारी प्राचीन परंपरा को बनाए रखते हुए, अपनी योजना और विकास प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना।

                                                                          


8. नीति आयोग के कार्यक्षेत्र:

नीति आयोग कई क्षेत्रों में काम करता है, जिनमें शामिल हैं:
● कृषि
● उद्योग
● शिक्षा
● स्वास्थ्य
● ऊर्जा
● जल संसाधन
● परिवहन
● ग्रामीण विकास
● शहरी विकास

9. नीति आयोग की पहलें:

नीति आयोग ने कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं, जिनमें शामिल हैं:
 अटल इनोवेशन मिशन (Atal Innovation Mission): यह देश में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक प्रमुख पहल है।
 डिजिटल इंडिया (Digital India): यह भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलने के लिए एक कार्यक्रम है।
● मेक इन इंडिया (Make in India): यह भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए एक पहल है।
 आयुष्मान भारत (Ayushman Bharat): यह भारत में स्वास्थ्य सेवा को बेहतर बनाने के लिए एक योजना है।
 समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha): यह शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक योजना है।

10.नीति आयोग के सात स्तंभ

नीति आयोग का समग्र कार्यप्रणाली प्रभावी शासन के निम्नलिखित सात स्तंभों पर आधारित है:

1.प्रो-पीपल (Pro-People): नीतियां नागरिकों की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूरा करने वाली होनी चाहिए।
2.प्रो-एक्टिव (Pro-Active): सरकार को सक्रिय और समय पर कार्रवाई करनी चाहिए।
3.पार्टिसिपेशन (Participation): नीतियों के निर्माण में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
4.एम्पॉवरिंग (Empowering): नागरिकों को सशक्त बनाना, खासकर महिलाओं को।
5.इंक्लूजन ऑफ ऑल (Inclusion of All): सभी का समावेश, ताकि कोई भी पीछे न छूटे।
6.इक्वालिटी (Equality): सभी को समान अवसर मिलना चाहिए।
7.ट्रांसपेरेंसी (Transparency): सरकार के कामकाज में पारदर्शिता होनी चाहिए।

                                                         

11 .नीति आयोग और योजना आयोग में मुख्य अंतर:

1. प्रकृति और दृष्टिकोण:

 योजना आयोग (Planning Commission): यह एक शीर्ष-से-नीचे (top-down) दृष्टिकोण वाली संस्था थी। इसका मतलब है कि यह केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई योजनाओं को राज्यों पर थोपती थी। यह केंद्रीकृत योजना पर अधिक केंद्रित थी।
 नीति आयोग (NITI Aayog): यह एक नीचे-से-ऊपर (bottom-up) दृष्टिकोण वाली संस्था है। यह राज्यों की आवश्यकताओं और विचारों को ध्यान में रखकर नीतियां बनाने पर जोर देती है। यह सहकारी संघवाद (cooperative federalism) को बढ़ावा देती है, जहाँ केंद्र और राज्य मिलकर काम करते हैं।

2. कार्य क्षेत्र:

● योजना आयोग (Planning Commission): इसका मुख्य कार्य पंचवर्षीय योजनाओं (Five-Year Plans) का निर्माण करना था, जो देश के आर्थिक विकास की दिशा तय करती थीं। यह संसाधनों का आवंटन और विभिन्न क्षेत्रों के लिए लक्ष्य निर्धारित करती थी।
● नीति आयोग (NITI Aayog): यह एक थिंक टैंक (think tank) के रूप में कार्य करता है। इसका कार्य नीतियों का निर्माण, अनुसंधान करना, नवाचार को बढ़ावा देना, और केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह देना है। यह पंचवर्षीय योजनाओं की तरह विशिष्ट लक्ष्यों और संसाधनों के आवंटन पर ध्यान केंद्रित नहीं करता है।

3. संरचना:

● योजना आयोग (Planning Commission): इसमें एक उपाध्यक्ष (Deputy Chairman) और कुछ पूर्णकालिक सदस्य होते थे, जिन्हें सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता था।
● नीति आयोग (NITI Aayog): इसमें एक अध्यक्ष (प्रधानमंत्री), एक उपाध्यक्ष, एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), पूर्णकालिक सदस्य, अंशकालिक सदस्य (पदेन), और विशेष आमंत्रित सदस्य होते हैं। राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल भी इसकी गवर्निंग काउंसिल का हिस्सा होते हैं।

4. भूमिका:

● योजना आयोग (Planning Commission): यह एक शक्तिशाली संस्था थी, जिसके पास संसाधनों के आवंटन और योजनाओं को लागू करने का अधिकार था।
● नीति आयोग (NITI Aayog): यह एक सलाहकार संस्था है, जिसके पास संसाधनों के आवंटन का अधिकार नहीं है। यह सरकार को नीतियां बनाने और उन्हें लागू करने में मदद करती है, लेकिन अंतिम निर्णय सरकार का होता है।

5. उद्देश्य:

● योजना आयोग (Planning Commission): इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना था।
● नीति  आयोग (NITI Aayog): इसका उद्देश्य सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) को प्राप्त करना और सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना है। यह नवाचार, उद्यमिता, और प्रौद्योगिकी के उपयोग पर जोर देती है।

12.महत्व और निष्कर्ष:

नीति आयोग भारत के विकास प्रतिमान में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है। यह केंद्रीकृत योजना से हटकर सहकारी संघवाद, नीतिगत सलाह और ज्ञान-आधारित शासन पर जोर देता है। राज्यों को विकास प्रक्रिया में बराबर का भागीदार बनाकर, यह देश की विविधता और जटिलता को बेहतर ढंग से संबोधित करने का प्रयास करता है। यह सरकार के लिए एक दिशात्मक और नीतिगत प्रेरक शक्ति के रूप में कार्य करता है, जिसका लक्ष्य सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करना और भारत को एक मजबूत तथा समृद्ध राष्ट्र बनाना है। हालाँकि, इसके पास वित्तीय शक्तियाँ न होने के कारण इसकी प्रभावशीलता काफी हद तक केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग पर निर्भर करती है।

                                                            


Tuesday, April 15, 2025

राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women - NCW)

                            राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women - NCW)       

1.परिचय (Introduction):


राष्ट्रीय महिला आयोग भारत सरकार का एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है। इसका गठन भारतीय संविधान के तहत महिलाओं के हितों की रक्षा करने, उनके कानूनी अधिकारों को सुनिश्चित करने और उनके खिलाफ होने वाले भेदभाव और अत्याचारों को रोकने के उद्देश्य से किया गया है। यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्था है।

2.स्थापना (Establishment):

● राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थापना राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 (National Commission for Women Act, 1990) के तहत की गई थी।

● राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन 31 जनवरी 1992 को हुआ है।

● पहली अध्यक्ष श्रीमती जयंती पटनायक थीं।

● वर्तमान अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर (19 अक्टूबर 2024 )

3.उद्देश्य (Objectives):

संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों की समीक्षा करना: महिलाओं के लिए संविधान और अन्य कानूनों के तहत प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों की जांच और समीक्षा करना।

विधायी उपायों की सिफारिश करना: महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए मौजूदा कानूनों में संशोधन या नए कानूनों को बनाने की सिफारिश करना।

शिकायतों का निवारण: महिलाओं के अधिकारों के उल्लंघन, भेदभाव और अत्याचार से संबंधित शिकायतों को सुनना और उचित कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करना।

नीतिगत मामलों पर सरकार को सलाह देना: महिलाओं को प्रभावित करने वाले सभी प्रमुख नीतिगत मामलों पर केंद्र सरकार को सलाह देना।

महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना: महिलाओं के विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेना और उनके सामाजिक-आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने के उपाय सुझाना।

जागरूकता बढ़ाना: महिलाओं को उनके अधिकारों और कानूनों के बारे में जागरूक करना।

4.संरचना (Structure):

एक अध्यक्ष (Chairperson): केंद्र सरकार द्वारा नामित, (जो महिलाओं के हितों के लिए प्रतिबद्ध हो)।

पांच सदस्य (Five Members): केंद्र सरकार द्वारा नामित, (जिन्हें कानून, ट्रेड यूनियनवाद, महिलाओं के उद्योग/प्रबंधन, महिला स्वयंसेवी संगठन, प्रशासन, आर्थिक विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा या समाज कल्याण जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल हो।
🠊इन सदस्यों में कम से कम एक अनुसूचित जाति (SC) और एक अनुसूचित जनजाति (ST) से होना अनिवार्य है)।

5.कार्य एवं शक्तियाँ (Functions and Powers):

आयोग के प्रमुख कार्य और शक्तियाँ निम्नलिखित हैं:

● जांच और पड़ताल: महिलाओं के लिए संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जांच और पड़ताल करना।

● रिपोर्ट प्रस्तुत करना: इन सुरक्षा उपायों के कामकाज पर वार्षिक या आवश्यकतानुसार रिपोर्ट केंद्र सरकार को प्रस्तुत करना।

सिफारिशें करना: संघ या किसी राज्य द्वारा महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए सुरक्षा उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सिफारिशें करना।

● कानूनों की समीक्षा: समय-समय पर महिलाओं से संबंधित संवैधानिक और अन्य कानूनों के प्रावधानों की समीक्षा करना और उनमें संशोधन की सिफारिश करना।

● अधिकारों के उल्लंघन के मामलों को उठाना: महिलाओं के अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों को उपयुक्त प्राधिकारियों के समक्ष उठाना।

शिकायतें देखना: उन शिकायतों को देखना और स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेना जहां: महिलाओं के अधिकारों का हनन हुआ हो,महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों का पालन न हुआ हो,महिलाओं की समानता और विकास के उद्देश्य से बनी नीतियों का पालन न हुआ हो।

● अनुसंधान (Research): महिलाओं से संबंधित मुद्दों, विशेष रूप से उनके सामने आने वाली बाधाओं पर अनुसंधान करना।

● नियोजन प्रक्रिया में भागीदारी: महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास की नियोजन प्रक्रिया में भाग लेना और सलाह देना।

● विकास का मूल्यांकन: संघ और किसी भी राज्य के तहत महिलाओं के विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना।

● सिविल कोर्ट की शक्तियाँ: आयोग को किसी भी मामले की जांच करते समय सिविल कोर्ट की शक्तियाँ प्राप्त होती हैं, जैसे:
🠊भारत के किसी भी हिस्से से किसी भी व्यक्ति को समन जारी करना और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा शपथ पर उसकी जांच करना।
🠊किसी भी दस्तावेज़ को खोजने और प्रस्तुत करने की आवश्यकता।
🠊शपथ पत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना।
🠊किसी भी सार्वजनिक रिकॉर्ड या उसकी प्रति की मांग करना।
🠊गवाहों और दस्तावेजों की जांच के लिए कमीशन जारी करना।

6.अन्य महत्वपूर्ण बिंदु -

● राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन - 31 जनवरी 1992 (05 अध्याय व 17 धाराएँ)

● मुख्यालय -नई दिल्ली 

● नोडल मंत्रालय -महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 

● UNO द्वारा अंतरष्ट्रीय महिला वर्ष घोषित -1992 

● कार्यकाल - 3 वर्ष या 65 वर्ष (अध्यक्ष व सदस्य)

● अध्यक्ष एवं सदस्य त्यागपत्र -केंद्र सरकार 

● अध्यक्ष सदस्य का वेतन भत्ता ,पदावधि,सेवासर्ते का निर्धारण -केंद्र सरकार 

● राष्ट्रीय महिला आयोग दिवस - 13 फरवरी 

7.महिला आयोग संबंधित प्रावधान -

● सखी वन स्टॉप सेंटर -2015 
● घरेलू हिंसा अधिनियम -2005 
● अनैतिक व्यापर अधिनियम -1956 
● प्रसव एवं पूर्व निदान तकनीक -1994
● दहेज़ हिंसा अधिनियम -1961  
● भारतीय दंड संहिता 1860 
● राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम 1990 
● कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और  निवारण) अधिनियम, 2013 

8.महिला आयोगों के समक्ष विद्यमान चुनौतियाँ: 
 
● पर्याप्त संसाधनों और स्वायत्तता का अभाव: 
🠊महिला आयोगों को प्रायः वित्तीय बाधाओं का सामना करना पड़ता है। वे सरकारी वित्तपोषण पर बहुत अधिक निर्भर होते हैं, जो उनकी स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है तथा प्रभावी ढंग से कार्य कर सकने की उनकी क्षमता को बाधित कर सकता है।  
● राजनीतिक हस्तक्षेप: 
🠊सत्तारूढ़ सरकार द्वारा मनोनीत होने के कारण महिला आयोगों को उन मामलों से बचने के लिये दबाव का सामना करना पड़ सकता है जो संभावित रूप से सरकार या उसके सहयोगियों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। 
🠊यह राजनीतिक हस्तक्षेप महिलाओं के अधिकारों के प्रति आयोग की निष्पक्षता एवं प्रतिबद्धता को कमज़ोर कर सकता है। 
● सीमित जागरूकता और पहुँच: 
🠊महिलाओं की एक बड़ी संख्या (विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में) महिला आयोगों के अस्तित्व और भूमिका से प्रायः अवगत नहीं है। 
🠊जागरूकता की कमी, चुनौतियों का सामना करने पर इन आयोगों से सहायता और समर्थन ले सकने की उनकी क्षमता को बाधित करती है। 

9.निष्कर्ष (Conclusion):

राष्ट्रीय महिला आयोग भारत में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण संस्था है। यह महिलाओं के खिलाफ होने वाले अन्याय के विरुद्ध एक आवाज के रूप में कार्य करता है और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यद्यपि इसकी कुछ सीमाएं हैं, फिर भी यह देश में लैंगिक समानता और न्याय को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।




                                                                     

Friday, April 4, 2025

भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक

                                          भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक            




भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है, जो देश की वित्तीय व्यवस्था के प्रहरी के रूप में कार्य करता है। 

● महालेखाकार का कार्यालय वर्ष 1858 में स्थापित किया गया था, ठीक उसी वर्ष जब अंग्रेज़ों ने ईस्ट इंडिया कंपनी से भारत का प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथों में लिया था।

● वर्ष 1860 में सर एडवर्ड ड्रमंड को पहले ऑडिटर जनरल के रूप में नियुक्त किया गया। इसके कुछ समय बाद भारत के महालेखापरीक्षक को भारत सरकार का लेखा परीक्षक और महालेखाकार कहा जाने लगा।

● वर्ष 1866 में इस पद का नाम बदलकर नियंत्रक महालेखा परीक्षक कर दिया गया और वर्ष 1884 में इसे भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के रूप में फिर से नामित किया गया।

● भारत सरकार अधिनियम, 1919 के तहत महालेखापरीक्षक को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर दिया गया क्योंकि इस पद को वैधानिक दर्जा दिया गया था।

● भारत सरकार अधिनियम, 1935 ने संघीय ढाँचे में प्रांतीय लेखा परीक्षकों के लिये प्रावधान करके महालेखापरीक्षक के पद को और शक्ति दी।

● वर्ष 1936 के लेखा और लेखा परीक्षा आदेश ने महालेखापरीक्षक के उत्तरदायित्वों और लेखा परीक्षा कार्यों का प्रावधान किया।

● यह व्यवस्था वर्ष 1947 तक अपरिवर्तित रही। स्वतंत्रता के बाद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा एक नियंत्रक और महालेखापरीक्षक नियुक्त किये जाने का प्रावधान किया गया।

● वर्ष 1958 में CAG के क्षेत्राधिकार में जम्मू और कश्मीर को शामिल किया गया।

● अधिनियम ने CAG को केंद्र और राज्य सरकारों के लिये लेखांकन और लेखा परीक्षा दोनों की ज़िम्मेदारी दी।

● वर्ष 1976 में CAG को लेखांकन के कार्यों से मुक्त कर दिया गया।

1. संवैधानिक प्रावधान:

अनुच्छेद 148:  भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति, कार्यकाल और शक्तियों का प्रावधान करता है।

 अनुच्छेद 149: CAG के कर्तव्यों और शक्तियों को परिभाषित करता है।

● अनुच्छेद 150: संघ और राज्यों के खातों के प्रारूप के बारे में बताता है, जो राष्ट्रपति द्वारा CAG की सलाह पर निर्धारित किया जाता है।

अनुच्छेद 151: CAG की रिपोर्टों को राष्ट्रपति और राज्यपालों के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रावधान करता है, जिन्हें बाद में संसद और राज्य विधानमंडलों में रखा जाता है।

अनुच्छेद 279 : इसमें प्रावधान है कि CAG "शुद्ध आगम" की गणना को प्रमाणित करता है और उसका प्रमाणपत्र अंतिम होता है।

● तीसरी अनुसूची : धारा IV में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों और CAG द्वारा पद ग्रहण करने पर ली जाने वाली शपथ या प्रतिज्ञान का प्रावधान है।

2. नियुक्ति, कार्यकाल और पदमुक्ति:

● CAG की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा उनके हस्ताक्षर और मुहर के तहत एक वारंट द्वारा की जाती है।

● CAG, अपना पद संभालने से पूर्व, राष्ट्रपति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान करता है और उस पर हस्ताक्षर करता है:

● भारत के संविधान के प्रति सच्ची आस्था और राजनिष्ठा बनाए रखना।

● भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखना।

● बिना किसी भय या पक्षपात, स्नेह या द्वेष के अपने कार्यालय के कर्त्तव्यों का विधिवत् और निष्ठापूर्वक तथा अपनी सर्वोत्तम क्षमता, ज्ञान एवं निर्णय लेने की कुशलता के अनुसार पालन करना।

● संविधान और कानूनों को कायम रखना।

● वह छह वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, पद पर रहता है।

● वह राष्ट्रपति को त्यागपत्र संबोधित करके किसी भी समय अपने पद को त्याग सकता है। उसे राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान आधारों पर और उसी तरीके से हटाया भी जा सकता है।

3. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु 

● भारत के CAG के बारे में: संविधान के अनुच्छेद 148 के अनुसार, भारत का CAG भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग का प्रमुख होता है। वह सार्वजनिक निधि की सुरक्षा और केंद्र एवं राज्य दोनों स्तरों पर वित्तीय प्रणाली की देखरेख के लिये ज़िम्मेदार होता है। 

● भारत का CAG नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कर्तव्य, शक्तियां और सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 द्वारा शासित होता है,(वर्ष 1976, 1984 और 1987 में महत्त्वपूर्ण संशोधन किये गए)

4.संपरीक्षा प्रतिवेदन:

● अनुच्छेद 151 संपरीक्षा प्रतिवेदन से संबंधित है। इसमें कहा गया है कि -
(1) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के संघ के लेखाओं संबंधी प्रतिवेदनों को राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जो उनको संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगा।
(2) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के किसी राज्य के लेखाओं संबंधी प्रतिवेदनों को उस राज्य के राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जो उनको राज्य के विधान-मंडल के समक्ष रखवाएगा।

5. कर्तव्य और शक्तियाँ:

● लेखा परीक्षा: CAG केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, और उन सभी संस्थाओं की लेखा परीक्षा करता है जिन्हें केंद्र या राज्य सरकार द्वारा पर्याप्त रूप से वित्त पोषित किया जाता है। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) और सरकारी विभाग शामिल हैं।

● अनुपालन लेखा परीक्षा: यह जांचना कि व्यय विधियों और नियमों के अनुसार है या नहीं।

● प्रदर्शन लेखा परीक्षा: यह जांचना कि सरकारी कार्यक्रम और परियोजनाएँ कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से लागू किए जा रहे हैं या नहीं।

● वित्तीय लेखा परीक्षा: यह सुनिश्चित करना कि वित्तीय विवरण सही और निष्पक्ष रूप से वित्तीय स्थिति को दर्शाते हैं।

● रिपोर्ट प्रस्तुत करना: CAG अपनी लेखा परीक्षा रिपोर्ट राष्ट्रपति (केंद्र के लिए) और राज्यपालों (राज्यों के लिए) को प्रस्तुत करता है।

● संसद/विधानमंडल की सहायता: CAG लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee - PAC) और सार्वजनिक उपक्रमों पर समिति (Committee on Public Undertakings - COPU) जैसी संसदीय समितियों को उनके कार्यों में सहायता करता है।

6. महत्व और भूमिका:

● वित्तीय जवाबदेही: CAG सरकारी खर्चों की निगरानी करके और अनियमितताओं को उजागर करके वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करता है।

● पारदर्शिता: CAG की रिपोर्टें सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध होती हैं, जिससे सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ती है।

● संसद और विधानमंडलों को जानकारी: CAG संसद और राज्य विधानमंडलों को सरकारी वित्त और खर्चों पर स्वतंत्र और विश्वसनीय जानकारी प्रदान करता है।

● सुशासन: CAG भ्रष्टाचार को रोकने और सुशासन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

● लोक धन का संरक्षक: CAG लोक धन का कुशल और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करता है।

7. CAG की स्वतंत्रता:

● CAG की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए संविधान में कई प्रावधान किए गए हैं:

● सुरक्षित कार्यकाल: CAG को केवल सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार पर ही हटाया जा सकता है।

● संचित निधि से वेतन: CAG का वेतन और भत्ते भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) पर भारित होते हैं, जिस पर संसद में मतदान नहीं होता है।

● पदमुक्ति के बाद प्रतिबंध: CAG को पदमुक्ति के बाद सरकार के अधीन किसी भी पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता है।

● कर्मचारियों की नियुक्ति: CAG अपने कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा शर्तों को निर्धारित करने में स्वतंत्र है।

CAG संबंधित प्रश्न:

प्रश्न-1. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के संवैधानिक प्रावधानों का वर्णन कीजिए।

प्रश्न-2. CAG की भूमिका और महत्व पर प्रकाश डालिए।

प्रश्न-3. CAG की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं?

प्रश्न-4. CAG की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए सुझाव दीजिए ?


                                                             


Wednesday, April 2, 2025

खजुराहो मंदिर

                             

खजुराहो मंदिर

 खजुराहो मंदिर, मध्य प्रदेश राज्य के छतरपुर जिला,सागर संभाग (बुन्देखण्ड पठार)में स्थित, भारतीय कला और संस्कृति का एक अद्भुत उदाहरण है। ये मंदिर अपने जटिल नक्काशीदार मूर्तियों और कामुक कला के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं।

इतिहास:

● खजुराहो हिंदू(शैव और वैष्णव) व जैन मंदिरों का समूह है, जो मध्य प्रदेश के छतरपुर ज़िले में विंध्य पर्वत शृंखला पर अवस्थित हैं। इतिहास मे इन मंदिरों का सर्वप्रथम लिखित उल्लेख अबू-रिहान-अल-बरूनी तथा अफ्रीकी यात्री इब्नबतूता के विवरणों में मिलता है।

● इन मंदिरों का निर्माण 950-1050 ईस्वी के मध्य चंदेल शासकों ने कराया था। गुप्तकाल के दौरान तराशे हुए पाषाण खंडों से मंदिर निर्माण की जो कला आरंभ हुई थी, वह चंदेलों के शासनकाल में अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँची। इस दौरान मंदिरों के निर्माण के लिये चिनाई पद्धति का प्रयोग किया जाने लगा था।

● खजुराहो के मंदिर वास्तुकला के ‘नागर शैली’ का अद्भुत उदाहरण हैं। गर्भगृह, शिखर (वक्रीय बुर्ज) और मंडप (प्रवेश द्वार) नागर शैली की प्रमुख विशेषताएँ हैं। सामान्य रूप से यहां के मंदिर बलुआ पत्थर से निर्मित किय गए हैं, लेकिन चौंसठ योगिनी, ब्रम्हा तथा लालगुआ महादेव मंदिर ग्रेनाइट से निर्मित है 

● खजुराहो के मंदिरों की वास्तुकला अत्यंत जटिल है। एक गर्भगृह, महामंडप, सभागृह, अर्धमंडप (अतिरिक्त सभागृह) तथा प्रदक्षिणा पथ इसके प्रमुख घटक हैं। यहाँ कुछ मंदिर पंचायतन शैली में भी बने हैं। ध्यातव्य है कि पंचायतन शैली के अंतर्गत एक केंद्रीय मंदिर के चारों कोनों पर चार अतिरिक्त मंदिर बने होते हैं।

● ऐतिहासिक अभिलेखों में दावा किया गया हैं कि 12 वीं सदी के दौरान लगभग 20 कि.मी. में फैले इन मंदिरों की संख्या 85 थी। इनमें से अधिकांश मंदिर नष्ट हो गए हैं तथा वर्तमान में इनकी संख्या लगभग 20-25 है।

● खजुराहो के मंदिर पश्चिमी, पूर्वी तथा दक्षिणी समूह में विभाजित हैं। इनमें पश्चिमी समूह के मंदिर शैव एवं वैष्णव संप्रदाय से संबंधित हैं। इन मंदिरों में चौंसठ योगिनी मंदिर, कंदरिया महादेव मंदिर, चित्रगुप्त मंदिर, देवी जगदंबा मंदिर, नंदी मंदिर, लक्ष्मण मंदिर (विष्णु् मंदिर), वराह मंदिर आदि प्रमुख हैं।

● पूर्वी समूह के मंदिर हिंदू व जैन संप्रदायों से संबंधित हैं। इसमें ब्रह्मा, वामन, आदिनाथ, पार्श्वनाथ तथा घंटाई मंदिर प्रमुख है। इसके अलावा, दुलादेव (शैव संप्रदाय) तथा जटकारी (वैष्णव संप्रदाय) मंदिर दक्षिणी समूह से संबंधित हैं।

खजुराहो से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण जानकारी :-

● खोज -1838 में टी.एस.बर्ट

● संस्थापक- चन्द्रवर्मन

● यूनेस्को द्वारा वर्ष 1986 में ‘विश्व धरोहर स्थल’ का दर्जा प्रदान किया गया था। (कंदरिया महादेव मंदिर के कारण) 

● प्रसिद्ध का कारण -कामुक्ता शैली या कामवासना शैली ,मप्र का प्रथम शिल्पग्राम ,मप्र का प्रथम हीरा संग्रहालय ,प्रथम यूनिस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल (1986),आदिवासी कला संग्रहालय ,एशिया का सबसे बड़ा पनीर संयंत्र ,

● आक्रमण -खजुराहो पर प्रथम मध्यकालीन आक्रमण गजनवी वंश के शासक मोहम्मद गजनवी के द्वारा किया गया था इस समय चंदेल वंश का शासक विद्याधर था ,जो युध्य में पराजित हो जाता है परन्तु गजनवी जीते हुए किले को वापस लौटा देता है और विद्याधर को महँ शासक के रूप में उल्लेखित करता है 

● निमाड़ का खजुराहो ऊन (खरगोन) को कहा जाता ,छोटा खजुराहो सोमेश्वर महादेव मंदिरको कहा जाता है,

● खजुराहो का उल्लेख -इब्नबतूता(मोहम्मद बिन तुकलाक) ,अलबरूनी (गजनवी),हेनसांग(हर्षवर्धन)

● अलबरूनी ने खजुराहो को जेजाकभुक्ति ,इब्नबतूता ने काजरा ,हेनसांग ने ती -ति -ची कहा है

● खजुराहो नृत्य समारोह -1975 (मप्र पर्यटन अकादमी ,मप्र संस्कृत अकादमी ,उस्ताद अलाउद्दीन खा अकादमी इन तीनो के संगठन से प्रयास से खजुराहो में खजुराहो नृत्य समारोह का आयोजन किया जाता है)

● खजुराहो में छत्रसाल हवाई अड्डा ,वायुयान अकादमी (2021) ,यहाँ पर पर्यटन ट्रैन रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स चलाई गयी है 

● खजुराहो मंदिरो का निर्माता -राजा धंग को कहा जाता हैं 

                                                                             



खजुराहो के महत्वपूर्ण मंदिर 

● पश्चिमी समूह: यह समूह सबसे महत्वपूर्ण है और इसमें कंदरिया महादेव मंदिर, लक्ष्मण मंदिर और विश्वनाथ मंदिर जैसे प्रमुख मंदिर शामिल हैं।

● पूर्वी समूह: इस समूह में जैन मंदिर और कुछ हिंदू मंदिर शामिल हैं।

● दक्षिणी समूह: इस समूह में दूल्हादेव मंदिर और चतुर्भुज मंदिर जैसे मंदिर शामिल हैं।

प्रमुख मंदिर:

● कंदरिया महादेव मंदिर: यह खजुराहो का सबसे बड़ा और सबसे अलंकृत मंदिर है। यह भगवान शिव को समर्पित है और अपनी उत्कृष्ट नक्काशी और जटिल मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है।

● लक्ष्मण मंदिर: यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और अपनी त्रिमुखी विष्णु प्रतिमा के लिए जाना जाता है। मंदिर की दीवारों पर विभिन्न देवताओं, अप्सराओं और दैनिक जीवन के दृश्यों को दर्शाया गया है।

● विश्वनाथ मंदिर: यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और अपनी विशाल शिवलिंग और सुंदर नंदी प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है।

● चौंसठ योगिनी मंदिर: यह खजुराहो का सबसे पुराना मंदिर है और यह 64 योगिनियों को समर्पित है। यह एक आयताकार मंदिर है और इसमें कोई शिखर नहीं है।

● पार्वती मंदिर: यह मंदिर भगवान शिव की पत्नी पार्वती को समर्पित है और अपनी सुंदर प्रतिमा के लिए जाना जाता है।


                                                            


Monday, March 24, 2025

मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम

                                                                          मुख्य परीक्षा
                                                                         प्रथम प्रश्न पत्र  
                                                                    खण्ड - (अ) इतिहास 

इकाई 1

● भारतीय इतिहास - भारत का राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक इतिहास, हड़प्पा सभ्यता से 10वीं शताब्दी तक।

● 11वीं से 18वीं शताब्दी तक भारत का राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक इतिहास। 

● सल्तनत एवं मुगल शासक और उनका प्रशासन एवं मध्यकालीन संस्कृति का अभ्युद्य। 

इकाई-2 

● प्रागेतिहासिक एवं आद्य ऐतिहासिक मध्यप्रदेश, मध्यप्रदेश के प्रमुख राजवंश, गर्दभिल्ल वंश, नागवंश, औलिंकर, परिव्राजक राजवंश, उच्च गुर्जर-प्रतिहार, कल्चुरी, चंदेल, परमार तोमर, गोंडवंश, कच्छपघात वंश। 

इकाई-3 

● ब्रिटिश शासन का भारतीय अर्थव्यवस्था एवं समाज पर प्रभाव।

● ब्रिटिश उपनिवेश के प्रति भारतीयों की प्रतिक्रिया - कृषक एवं जनजातियों का विद्रोह, प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन / संग्राम। भारतीय पुनर्जागरण- राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन एवं इसके नेतृत्वकर्ता। 

● मध्यप्रदेश में स्वतंत्रता आंदोलन।

इकाई -4 

● गणतंत्र के रूप में भारत का उदय राज्यों का पुनर्गठन, मध्यप्रदेश राज्य के रूप में गठन, स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् की प्रमुख घटनाएँ। 

● भारतीय सांस्कृतिक विरासत (मध्यप्रदेश के विशेष संदर्भ में)- प्राचीन काल से आधुनिक काल तक विभिन्न कला प्रारूपों, साहित्य, पर्व (उत्सव ) एवं वास्तुकला के प्रमुख पक्ष। 

● म.प्र. में विश्व धरोहर स्थल एवं पर्यटन। 

इकाई-5 

● मध्यप्रदेश की प्रमुख रियासतें - गोंडवाना, बुंदेली, बघेली, होल्कर, सिंधिया एव भोपाल रियासत (स्वतंत्रता प्राप्ति तक )। 

● मध्यप्रदेश के जनजातीय नायकों का संघर्ष एवं इतिहास में योगदान- राजा शंकरशाह, रघुनाथ शाह, रानी दुर्गावती, भीमाजी नायक, खाज्यानायक टंट्या भील, गंजनसिंह कोरकू, बादल भोई, पेमा फाल्या। 

                                                                         प्रथम प्रश्न पत्र
                                                                      खण्ड - (ब) भूगोल 

इकाई -1 भारत का भौतिक स्वरूप एवं जलवायु 

● प्राचीन भारत में भौगोलिक ज्ञान। 

● भारत के प्रमुख भू-आकृतिक (भौतिक) विभाग - हिमालय पर्वत, उत्तर भारत का विशाल मैदान और प्रायद्वीपीय पठार। 

● प्रमुख पहाड़ियाँ, पठार, नदियाँ और झीलें। 

● भारत में मिट्टियाँ - प्रकार एवं वितरण। 

● जलवायु— ऋतुएँ, तापमान, वर्षा, मानसून की उत्पत्ति, ऊपरी वायु परिसंचरण - जेट स्ट्रीम। 

● जलवायु घटनाएँ - अल-नीनो, ला नीना, दक्षिणी दोलन, पश्चिमी विक्षोभ, हिंद महासागर, द्विध्रुव, जलवायु परिवर्तन के परिणाम। 

इकाई - 2 भारत - कृषि एवं जल संसाधन 

● कृषि - प्रमुख फसलें और श्रीअन्न (मोटे अनाज), उनका उत्पादन और वितरण।

● सिंचाई - सिंचाई तकनीकों के प्रकार, सिंचाई के स्रोत और बहुउद्देशीय परियोजनाएँ।

● खाद्य सुरक्षा, हरित क्रांति, द्वितीय हरित क्रांति और सतत् कृषि के लिए रणनीतियाँ।

● जल संसाधनों का संरक्षण और संवर्धन, वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण के तरीके, नदियों को आपस में जोड़ना, राष्ट्रीय जल नीति।

इकाई - 3 भारत - प्राकृतिक संसाधन एवं उद्योग 

● वन संसाधन, इनके प्रकार और वितरण। 

● प्रमुख खनिज और ऊर्जा संसाधन। 

● ऊर्जा संकट और ऊर्जा के गैर-पारंपरिक स्रोत। 

● प्रमुख उद्योग- लोहा और इस्पात, सीमेंट, कागज, शक्कर, सूती वस्त्र उद्योग।

● प्रमुख खाद्य प्रसंस्करण उद्योग। 

इकाई - 4 आपदाएँ और तकनीकें 

● भारत में प्राकृतिक खतरे और आपदाएँ- भूकंप, सुनामी, सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, कोहरा, बादल फटना, तड़ित झंझा, भारत में उष्णकटिबंधीय चक्रवात। 

● पर्यावरण प्रदूषण- वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मिट्टी या भूमि प्रदूषण एवं उनका रोकथाम, नियंत्रण और प्रबंधन, प्रदूषण को कम करने के उपाय। 

● भारत में जनसंख्या वृद्धि, संसाधनों पर जनसंख्या का दबाव, ग्रामीण - शहरी प्रवास।

●  भूगोल में उन्नत तकनीकें - सुदूर संवेदन, भौगोलिक सूचना प्रणाली (जी.आई.एस.), भौगोलिक स्थिति निर्धारण प्रणाली ( जी.पी.एस.) तथा इनके अनुप्रयोग। उपग्रहो के प्रकार। 

इकाई - 5 मध्यप्रदेश का भूगोल 

● प्रमुख भू-आकृतिक (भौतिक) विभाग - मालवा का पठार, मध्य भारत का पठार, बुन्देलखण्ड पठार, विंध्याचल श्रेणी, बघेलखंड पठार, नर्मदा - सोन घाटी, सतपुड़ा श्रेणी। 

● प्रमुख नदियाँ और उनकी सहायक नदियाँ ! 

● जलवायु - ऋतुएँ, तापमान, वर्षा। 

● मध्यप्रदेश की मिट्टियाँ, प्रकार एवं वितरण, मृदा अपरदन एवं मृदा संरक्षण। 

● प्राकृतिक वनस्पति- वनों के प्रकार और वितरण, प्रमुख वनोपज। 

● प्रमुख फसलें, सिंचाई एवं सिंचाई परियोजनाएँ। 

● प्रमुख खनिज और ऊर्जा संसाधन, ऊर्जा के गैर-पारंपरिक स्रोत। 

● प्रमुख उद्योग, लघु एवं कुटीर उद्योग। 

● जनसंख्या वृद्धि, वितरण और घनत्व, नगरीकरण। 

                                                                        द्वितीय प्रश्न पत्र
                                   
 खण्ड - ( अ ) संविधान, शासन व्यवस्था, राजनैतिक एवं प्रशासनिक संरचना 

इकाई-1 

● भारतीय संविधान - निर्माण, विशेषताएँ, मूल ढाँचा एवं प्रमुख संशोधन। 

● वैचारिक तत्व - उद्देशिका, मूल अधिकार, मूल कर्तव्य एवं राज्य के नीति-निदेशक तत्व। 

● संघवाद – केन्द्र-राज्य संबंध, उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय, न्यायिक पुनरावलोकन, न्यायिक सक्रियता, लोक अदालत एवं जनहित याचिका। 

इकाई-2 

● भारत निर्वाचन आयोग, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, संघ लोक सेवा आयोग, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग एवं नीति आयोग। 

● भारतीय राजनीति में जाति, धर्म, वर्ग, नृजातीयता, भाषा एवं लिंग की भूमिका, भारतीय राजनीति में राजनीतिक दल एवं मतदान व्यवहार, सिविल सोसायटी एवं जन आंदोलन, राष्ट्रीय अखंडता तथा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे। 

इकाई-3 

● लोकतंत्र की विशेषताएँ- राजनीतिक प्रतिनिधित्व, निर्णय प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी। 

● समुदाय आधारित संगठन (CBO), गैर सरकारी संगठन (NGO) एवं स्व-सहायता समूह (SHG)।

● मीडिया की भूमिका एवं समस्याएँ (इलेक्ट्रॉनिक, प्रिन्ट एवं सोशल मीडिया)।

● भारतीय राजनीतिक विचारक - कौटिल्य, देवी अहिल्याबाई होलकर, महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, राममनोहर लोहिया, डॉ. भीमराव आम्बेडकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, जयप्रकाश नारायण। 

इकाई - 4  

● राज्यों का पुनर्गठन 1956 तथा मध्यप्रदेश का निर्माण, मध्यप्रदेश का विभाजन (2000)।

● राज्यपाल - नियुक्ति, शक्ति, स्थिति, मुख्यमंत्री एवं मंत्रिपरिषद- संगठन, कार्य एवं भूमिका।

● मध्यप्रदेश की विधानसभा - संगठन एवं शक्तियाँ, अध्यक्ष की भूमिका, विपक्ष की भूमिका। 

● मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, संगठन, क्षेत्राधिकार एवं भूमिका। 

● जवाबदेही एवं अधिकार - प्रतिस्पर्धा आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग, केन्द्रीय सतर्कता आयोग, मानव अधिकार आयोग, सूचना आयोग, उपभोक्ता फोरम, बाल आयोग, महिला आयोग। 

इकाई- 5 

● मध्यप्रदेश का प्रशासन - सचिवालय, मुख्य सचिव, सचिव तथा आयुक्त, मध्यप्रदेश में जिला प्रशासन, जिलाधीश की भूमिका। 

● मध्यप्रदेश में ग्रामीण स्थानीय स्वशासन - पंचायतीराज संगठन एवं शक्तियाँ, शहरी स्थानीय स्वशासन- संगठन एवं शक्तियाँ, स्थानीय स्वशासन में वित्त नौकरशाही एवं स्वायत्तता का महत्व। 

● मध्यप्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य - जनजातीय, पिछड़े एवं वंचित वर्ग का उत्थान एवं नक्सली समस्या से जुड़े मुद्दे। 

● मध्यप्रदेश की राजनीति में महिलाओं का योगदान। 

● मध्यप्रदेश की राजनीति में समसामयिक मुद्दे ! 

                                                                     द्वितीय प्रश्न पत्र
                                                              खण्ड - (ब) समाजशास्त्र 

इकाई-1 समाजशास्त्र की आधारभूत अवधारणा 

● समाज की भारतीय संकल्पना - कुटुम्ब, परिवार, नातेदारी, वंश, गोत्र परंपरा। 

● समुदाय, संस्था, संघ, संस्कृति, मानदंड और मूल्य। 

● सामाजिक समरसता के तत्व, सभ्यता एवं संस्कृति की अवधारणा। भारतीय संस्कृति की विशेषताएँ। 

● सामाजिक संस्थाएँ - परिवार, शिक्षा, धर्म, वर्ण, ऋण, यज्ञ, संस्कार। 

● अनुष्ठान - विभिन्न संदर्भ, जाति व्यवस्था। आश्रम, पुरुषार्थ, समाज और विवाह पर धर्म और संप्रदायों का प्रभाव। 

इकाई - 2 भारतीय समाज में विविधता और चुनौतियाँ 

● भारतीय समाज की संकल्पना - भारत के लोग, विविधता में एकता। 

● सांस्कृतिक विविधता- क्षेत्रीय, भाषायी, धार्मिक और जनजातीय। 

● अपराध का बदलता परिदृश्य - नशीली दवाओं की लत, आत्महत्या, साइबर अपराध, महिलाओं के प्रति अपराध एवं घरेलू हिंसा। 

● वर्तमान बहस - भारत में परंपरा और आधुनिकता। 

● राष्ट्र निर्माण की समस्याएँ - धर्मनिरपेक्षता, बहुलवाद और राष्ट्र निर्माण। 

इकाई - 3 ग्रामीण एवं नगरीय समाजशास्त्र 

● ग्रामीण समाज के अध्ययन के उपागम ग्रामीण-शहरी अंतर, ग्रामीणवाद और नगरवाद। 

● किसान अध्ययन, 73वें संशोधन से पहले और बाद में पंचायती राज व्यवस्था, ग्रामीण नेतृत्व, गुटबाजी, लोक सशक्तीकरण। 

● ग्रामीण विकास के सामाजिक मुद्दे और रणनीतियाँ- बंधुआ और प्रवासी मजदूर, ग्रामीण समाज में बदलाव के रुझान। 

● नगरीय समुदाय की विशेषताएँ, नगरीय समुदाय में परिवर्तन, नगरीकरण के कारण एवं प्रभाव। 

● नगर नियोजन की अवधारणा, नगर नियोजन को प्रभावित करने वाले कारक, भारत में नगरीय प्रबंध की समस्याएँ। 

इकाई -4 औद्योगीकरण, वैश्वीकरण, सामाजिक विकास और जनसंख्या 

● भारत में औद्योगीकरण और सामाजिक परिवर्तन- परिवार, शिक्षा, स्तरीकरण पर प्रभाव। औद्योगिक समाज में वर्ग और वर्ग संघर्ष। 

● वैश्वीकरण की चुनौतियाँ, समाजशास्त्र का भारतीयकरण, शिक्षा का निजीकरण।

● सामाजिक संरचना और विकास, सुविधाप्रदाता, अवरोधक, विकास और सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ। 

● संस्कृति और विकास - सहायक / बाधक के रूप में संस्कृति, उत्तर-आधुनिकीकरण, पश्चिमीकरण। 

● भारत में जनसंख्या वृद्धि और वितरण - 1901 से वृद्धि, कारण और प्रभाव। 

● अवधारणाएँ– प्रजनन क्षमता, मृत्यु दर, रुग्णता, प्रवास, आयु और लिंग संरचना। 

इकाई - 5 मानव संसाधन विकास और सामाजिक कल्याण की योजनाएँ 

● राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 - विजन, सिद्धांत, स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा, ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा, वयस्क शिक्षा और जीवन - पर्यन्त सीखना।

● सामाजिक वर्गों और उनके कल्याण कार्यक्रमों से संबंधित मुद्दे - वरिष्ठ नागरिक, बच्चे, महिलाएँ, विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग और विकासात्मक परियोजनाओं से उत्पन्न विस्थापित समूह, बालिकाओं की शिक्षा से जुड़े मुद्दे। 

● सामुदायिक विकास कार्यक्रम, विस्तार शिक्षा, पंचायती राज, सामुदायिक विकास में गैर-सरकारी संगठनों (एन.जी.ओ.) की भूमिका। 

● मध्यप्रदेश में जनजातियों की स्थिति एवं सामाजिक संरचना, रीति-रिवाज। जनजातियों में विश्वास, विवाह रिश्तेदारी, धार्मिक विश्वास, परंपराएँ, त्यौहार और उत्सव। 

● मध्यप्रदेश की लोक संस्कृति। 

                                                                  तृतीय प्रश्न पत्र
                                                            खण्ड - (अ) अर्थशास्त्र 

इकाई -1 भारतीय अर्थव्यवस्था के मौलिक पहलू 

● भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ। 

● विकसित भारत@2047। 

● कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र का क्षेत्रीय योगदान। 

● राष्ट्रीय आय की विभिन्न अवधारणाएँ। 

● प्रमुख फसलें और फसल पैटर्न। 

● चुनौतियाँ - घटती उत्पादकता, किसान संकट और मौसम पर निर्भरता। 

● सरकारी पहल - पीएम- किसान, एनएमएसए और विभिन्न योजनाएँ। 

● कृषि मूल्य नीति, विपणन और वित्त। 

● मूल्यवर्धन के लिए कृषि स्टार्ट-अप और कृषि - प्रसंस्करण। 

● भारत में औद्योगिक नीतियाँ और औद्योगिक विकास। 

● विनिर्माण और अधोसंरचना - मेक इन इंडिया और अधोसंरचना परियोजनाएँ। 

● आतिथ्य और पर्यटन - विदेशी मुद्रा आय में योगदान। 

● भारत में वस्तु व सेवाओं का मानकीकरण। 

इकाई-2 कराधान और नीति परिदृश्य 

● राजकोषीय नीति- लोक व्यय, आगम, कराधान और घाटा प्रबंधन। 

● मौद्रिक नीति और भारत में वित्तीय समावेशन। 

● अनौपचारिक अर्थव्यवस्था पर नकद लेनदेन का प्रभाव।

● खाद्य सुरक्षा एवं लोक वितरण प्रणाली। 

● गरीबी, बेरोजगारी और क्षेत्रीय असंतुलन। 

● भारत का विदेशी व्यापार - मूल्य, संरचना और दिशा। 

● निर्यात प्रोत्साहन, आयात प्रतिस्थापन और विदेशी पूँजी। 

● अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की भूमिकाएँ - आई.एम.एफ., विश्व बैंक, ए. डी. बी. और डब्ल्यू.टी.ओ.। 

इकाई - 3 मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था का अवलोकन 

● मध्यप्रदेश में राज्य घरेलू उत्पाद और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि। आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश (ANMP)। एक जिला एक उत्पाद कार्यक्रम (ODOP)। 

● प्रमुख फसलें और फसल पैटर्न तथा जोत। खाद्य सुरक्षा, वितरण प्रणाली और भंडारण। 

● उद्यानिकी, पशुधन, डेयरी व मत्स्य पालन। औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति, अधोसंरचना का विकास। 

● एम. एस.एम.ई. और पारंपरिक उद्योगों का विकास और समर्थन। 

● मध्यप्रदेश में ग्रामीण एवं शहरी विकास, जनजातीय अर्थव्यवस्था - कृषि पद्धति, प्रमुख 

● वनोपज, हस्तशिल्प एवं हाट बाजार। 

● पर्यटन, व्यापार और निवेश प्रोत्साहन। 

इकाई -4 मध्य प्रदेश में सामाजिक एवं आर्थिक विकास 

● स्वास्थ्य अधोसंरचना, शिक्षा और कौशल विकास। 

● प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के लिए नीतियाँ - वन, जल और खनिज। 

● वित्तीय, सामाजिक समावेशन एवं कल्याणकारी योजनाएँ। 

● मध्यप्रदेश की जनसांख्यिकी का प्रभाव। 

● मानव संसाधन की उत्पादकता और रोजगार। 

● मध्यप्रदेश में बौद्धिक सम्पदा अधिकारों की प्रगति। 

● राज्य का राजस्व, व्यय, ऋण एवं राजकोषीय अनुशासन। 

इकाई -- 5 सांख्यिकी, डेटा विश्लेषण और प्रायिकता 

● समंक संकलन की विधियाँ। 

● माध्य, माध्यिका और बहुलक - गणना और व्याख्याएँ। 

● डेटा विश्लेषण के प्रकार - वर्णनात्मक बनाम अनुमानात्मक। 

● प्रतिचयन की विधियाँ। 

● डेटा प्रस्तुति तकनीक - टेबल, चार्ट, ग्राफ ! 

● प्रायिकता की बुनियादी अवधारणाएँ। 

                                                                   तृतीय प्रश्न पत्र
                                          खण्ड - (ब) विज्ञान, तकनीकी एवं जन स्वास्थ्य
 

इकाई - 1 सामान्य विज्ञान 

● विज्ञान के साधारण अनुप्रयोग। 

● सूक्ष्मजीव संरचना एवं प्रकार, जैविक कृषि। 

● कोशिका - संरचना, प्रकार, विभाजन एवं कार्य, जन्तुओं एवं पौधों का वर्गीकरण। 

● पौधों, पशुओं एवं मनुष्यों में पोषण, संतुलित आहार, विटामिन, हीनताजन्य रोग, हार्मोन्स, मानव शरीर के अंग, संरचना एवं कार्य - प्रणाली। 

● जैव प्रौद्योगिकी - परिभाषा, स्वास्थ्य और चिकित्सा, कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, उद्योग और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में उपयोग। 

● ईथनोबायोलॉजी के अनुप्रयोग। 

● प्राचीन समय में आर्यभट्ट, वराहमिहिर, ब्रहमगुप्त एवं भास्कर प्रथम एवं द्वितीय द्वारा खगोल शास्त्र में योगदान। प्राचीन एवं आधुनिक भारतीय वेधशालाओं से संबंधित प्रारंभिक जानकारी। 

● बौद्धिक संपदा के अधिकार एवं पेटेंट (ट्रिप्स, ट्रिम्स)। 

इकाई-2 कंप्यूटर विज्ञान 

● कंप्यूटर के प्रकार, विशेषताएँ एवं पीढ़ी (जनरेशन)। 

● मेमोरी, इनपुट और आउटपुट डिवाइसेस, स्टोरेज डिवाइस, सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर, ऑपरेटिंग सिस्टम, विंडोज, माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के उपयोग। 

● कंप्यूटर की भाषाओं का सामान्य ज्ञान, (सी, सी ++, जावा), ट्रांसलेटर, इन्टरपिटर तथा एसेंबलर। 

● इन्टरनेट एवं ई-मेल। 

● सोशल मीडिया। 

● ई-गवर्नेस। 

● कृत्रिम बुद्धिमता का आधारभूत ज्ञान (ए.आई.), क्लाउड कम्प्यूटिंग, विभिन्न उपयोगी पोर्टल और वेबसाइट तथा वेबपेजेस। 

गणितीय विज्ञान 

● संख्याएँ एवं इसके प्रकार इकाई मापन की विधियाँ समीकरण एवं गुणनखंड, लाभ-हानि, प्रतिशत, साधारण एवं चक्रवृद्धि ब्याज, अनुपात -समानुपात। 

● ज्यामितीय आकृतियों का क्षेत्रफल एवं पृष्ठीय क्षेत्रफल। 

इकाई-3 

● आयुष (AYUSH ) - आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा, सोवा रिग्पा, होम्योपैथी चिकित्सा पद्धतियों के मूल सिद्धांत।

● वन नेशन वन हेल्थ सिस्टम / पॉलिसी-2030। 

● आयुर्वेद - त्रिदोष, पंचमहाभूत (आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी), दिनचर्या, ऋतुचर्या, पंचकर्म की प्रारंभिक जानकारी। जैविक घड़ी। 

● केन्द्र, राज्य, जिला एवं ग्राम स्तर पर आयुष सहित स्वास्थ्य प्रशासन। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (NHP) एवं इसमें आयुर्वेद का क्षेत्र। 

● योग - पंचकोष सिद्धांत, अष्टांग योग, षट्कर्म, मुद्रा की प्रारंभिक जानकारी। प्राकृतिक चिकित्सा - मिट्टी चिकित्सा, धूप सेवन (Sun Bath), जल चिकित्सा के चिकित्सकीय प्रभाव एवं प्रकार। 

● षोडश संस्कार - नामकरण, निष्क्रमण, कर्णवेध आदि का सामान्य ज्ञान एवं इनका वैज्ञानिक महत्व। 

इकाई -4 

● राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम - स्वास्थ्य स्वच्छता एवं बीमारियाँ, कुष्ठ (एन.एल.ई.पी.), एड्स ( एन. ए. सी.पी.), अंधत्व (एन.पी.सी.बी.), पोलियो, राष्ट्रीय क्षय निवारण कार्यक्रम, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य ( आर.सी.एच.) कार्यक्रम, इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेव्हलपमेंट स्कीम (आई.सी.डी.एस.), सार्वभौमिक एवं राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम। राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एन.एफ.एच.एस.)। 

● स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एन.आर. एच. एम. और एन.यू.एच.एम.), मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर। 

● विभिन्न बायोमार्कर यथा - हेमेटोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, सीरोलॉजी के सामान्य स्तर की जानकारी। 

● प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल - प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल का सिद्धांत और तत्व, स्वास्थ्य देखभाल का स्तर, उपकेन्द्र एवं ग्राम स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की संरचना, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल केन्द्र (PHC ), सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (CHC) और ग्रामीण चिकित्सालयों के स्तर। 

इकाई -5 

● भारतीय परंपरा और संस्कृति में पर्यावरण की अवधारणा। जनपदोध्वंस - वायु, जल, देश, काल की विकृतियाँ। 

● मानव गतिविधियों का पर्यावरण पर प्रभाव, पर्यावरण से संबंधित नैतिकता और मूल्य, जैव-विविधता (विशेष रूप से मध्यप्रदेश के संदर्भ में), पर्यावरण- प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन। लुप्तप्राय एवं विलुप्त प्रजातियाँ। 

● पर्यावरण से संबंधित समस्याएँ और चुनौतियाँ, पर्यावरणीय क्षरण के कारण और प्रभाव। पर्यावरण शिक्षा - सार्वजनिक जन जागरुकता के कार्यक्रम, पर्यावरण शिक्षा एवं उसका स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से संबंध। 

● पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकी, पर्यावरण संरक्षण के संवैधानिक प्रावधान। पर्यावरण संरक्षण नीतियाँ और नियामक ढाँचा। 

● पर्यावरण संरक्षण में मध्यप्रदेश की जनजातियों की भूमिका ( बैगा, सहरिया, भारिया, भील, गोंड इत्यादि। 

● ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन - नगरीय और औद्योगिक अपशिष्ट के कारण, प्रभाव एवं नियंत्रण के उपाय। 

● स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान - उद्देश्य, विभिन्न चरण, उपलब्धियाँ तथा भविष्य। 

● जल सुरक्षा। 

● जल संरक्षण के क्षेत्र में किए जाने वाले विभिन्न प्रयास। 

                                                                       चतुर्थ प्रश्नपत्र
                                     खण्ड - (अ) दर्शनशास्त्र, मनोविज्ञान, लोक प्रशासन एवं केस स्टडी 

इकाई -1 भारतीय षड्दर्शन, दार्शनिक / विचारक, समाज सुधारक 

● भारतीय षड्दर्शन। सुकरात, प्लेटो, अरस्तू। 

● महावीर, बुद्ध, आचार्य शंकर, चार्वाक, भर्तृहरि। 

● गुरुनानक, कबीर, तुलसीदास, संत रविदास। 

● रवीन्द्रनाथ टैगोर, राजा राममोहन राय, देवी अहिल्याबाई होलकर, सावित्रीबाई फुले। 

● स्वामी दयानंद सरस्वती स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविन्द, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉ. भीमराव आम्बेडकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय। 

इकाई - 2 राष्ट्र निर्माण एवं नैतिक अवधारणाएँ 

● राष्ट्र की अवधारणा, शक्ति एवं घटक। 

● राष्ट्रीय सुरक्षा, हित एवं चरित्र। 

● राष्ट्रीय सुरक्षा संचालन, सशस्त्र सैन्य बल, अंग एवं प्रकार तथा गुप्तचर एजेंसियाँ। 

● मूल नैतिक अवधारणाएँ - शुभ, सद्गुण, अहिंसा, उत्तरदायित्त्व। 

● भगवद्गीता का नीतिशास्त्र एवं प्रशासन में उसकी भूमिका । 

इकाई - 3 मानवीय व्यवहार एवं मनोचिकित्सा 

● मनोवृत्ति - विषयवस्तु, तत्व, प्रकार्य, मनोवृत्ति का निर्माण, मनोवृत्ति में परिवर्तन, प्रबोधक संप्रेषण, पूर्वाग्रह तथा भेदभाव, भारतीय संदर्भ में रूढ़िवादिता। 

● अभिक्षमता - अभिक्षमता एवं लोक सेवा हेतु आधारभूत मूल्य, सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता एवं असमर्थकवादी, वस्तुनिष्ठता, लोक सेवा के प्रति समर्पण, समानुभूति, सहिष्णुता एवं कमजोर वर्गों के प्रति संवेदना। 

● सांवेगिक बुद्धि - सम्प्रत्यय, शासन-प्रशासन में इसकी उपयोगिता एवं अनुप्रयोग। 

● व्यक्तिगत भिन्नताएँ- कारक, सिद्धांत एवं व्यवहार भिन्नताएँ। 

● मनोविकार एवं मनोचिकित्सा - अवसाद, सामाजिक दुश्चिंता मनोविकार, सिजोफेनिया, सामाजिक दुर्भीति, द्विध्रुवी मनोविकार। मनोचिकित्सा - व्यक्ति केन्द्रित चिकित्सा, व्यवहार चिकित्सा, तर्क संगत भावनात्मक व्यवहार चिकित्सा, संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा, सकारात्मक चिकित्सा एवं पारिवारिक चिकित्सा। 

इकाई -4 लोक प्रशासन में नैतिक मूल्य 

● मानवीय आवश्यकताएँ एवं अभिप्रेरणा - मानव व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले विभिन्न तत्व, कर्तव्यपरायणता, मूल्यबोध, जीवन मूल्य, संवेदनशीलता, टेक्नोलॉजी एवं नैतिक मूल्य।

● लोक प्रशासन में नैतिक सद्गुण एवं मूल्य - प्रशासन में नैतिक तत्व - सत्यनिष्ठा, उत्तरदायित्व एवं पारदर्शिता, नैतिक तर्क एवं नैतिक दुविधा तथा नैतिक मार्गदर्शन के रूप में अंतरात्मा, लोक सेवकों हेतु आचरण संहिता, शासन में उच्च मूल्यों का पालन। 

● भ्रष्टाचार - भ्रष्टाचार के प्रकार एवं कारण, भ्रष्टाचार का प्रभाव, भ्रष्टाचार को अल्पतम करने के उपाय, समाज, सूचनातंत्र, परिवार एवं व्हिसिलब्लोअर की भूमिका, भ्रष्टाचार पर राष्ट्रसंघ की घोषणा, भ्रष्टाचार का मापन, ट्रांसपरेंसी इन्टरनेशनल, लोकपाल एवं लोकायुक्त। 

इकाई - 5-- केस स्टडी - प्रश्नपत्र के खण्ड (अ) में सम्मिलित विषयवस्तु पर आधारित पाठ्यक्रम। 

                                                                        चतुर्थ प्रश्नपत्र
                                      खण्ड - ( ब ) उद्यमिता, प्रबंधन, व्यक्तित्व विकास एवं केस स्टडी 

इकाई-1 उद्यमिता अवधारणा एवं विकास 

● उद्यमिता की अवधारणा एवं महत्व। 

● उद्यमशीलता के लक्षण, सिद्धांत, विशेषताएँ एवं नवाचार का महत्व। 

● उद्यमशीलता की प्रक्रिया - सृजनशीलता, विचार सृजन, अनुवीक्षण एवं व्यवसाय योजना। 

● नए उद्यम प्रबंधन में मुख्य मुद्दे एवं वैधानिक आवश्यकताएँ, महिला उद्यमियों के सामने आने वाली चुनौतियाँ। 

● भारत में उद्यमिता का विकास - स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया, भारत में उद्यमिता विकास को बढ़ावा देने वाले संस्थान। 

इकाई - 2 व्यावसायिक संगठन एवं प्रबंधन 

● प्रबंध - अवधारणा, महत्व, क्षेत्र, प्रबंध एवं प्रशासन। क्रय तथा सामग्री प्रबंधन। 

● प्रबंध प्रक्रिया, संसाधन प्रबंधन एवं प्रबंध के कार्य नियोजन, संगठन, निर्देशन, नियंत्रण, समन्वय, निर्णयन, अभिप्रेरणा, नेतृत्व एवं संचार। 

● समय प्रबंधन एवं संगठन। 

● ब्रांडिंग, मार्केटिंग एवं नेटवर्किंग। 

इकाई - 3 प्रशासन व प्रबंधन 

● लोक प्रशासन में प्रबंध के महत्वपूर्ण आयाम। मानव संसाधन प्रबंध। 

● वित्तीय प्रबंध - लोक प्रशासन में उनका कार्यक्षेत्र एवं महत्व। 

● लोक कार्य क्षेत्र में तनाव प्रबंधन एवं विवाद प्रबंधन की विभिन्न तकनीकें एवं उनका महत्व। 

● बहुलता (अनेकता) का प्रबंधन एवं प्रशासन, जन प्रबंधन के अवसर एवं चुनौतियाँ। 

● आपदा प्रबंधन। 

इकाई-4 समग्र व्यक्तित्व विकास 

● समग्र व्यक्तित्व एवं राष्ट्रीय विकास। 

● व्यक्तित्व विकास के विभिन्न घटक। 

● सफलता की अवधारणा। 

● सफलता प्राप्त करने में बाधाएँ। 

● सफलता के लिए जिम्मेदार कारक। 

● असफलता से सीखना - असफलताओं को मूल्यवान अंतर्दृष्टि और निरंतर सुधार के अवसर के रूप में स्वीकार करना। 

● सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन - सरकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी रणनीतियों को क्रियान्वित करना। 

● निम्नांकित मुद्दों से संबंधित तथ्य और दृष्टिकोण - नागरिक बोध, संस्था के प्रति निष्ठा, मतदाता जागरूकता कार्यक्रम, यातायात प्रबंधन, नशाखोरी की प्रवृत्ति, खाद्य पदार्थों में मिलावट, नाइट कल्चर, मूल्य आधारित जीवन एवं विधिक जागरुकता कार्यक्रम। 

इकाई - 5 -- केस स्टडी - प्रश्नपत्र के खण्ड (ब) में सम्मिलित विषयवस्तु पर आधारित पाठ्यक्रम। 

                                                              

                                                                       षष्ठम प्रश्नपत्र
                                                           हिंदी निबंध एवं प्रारूप लेखन 

1. प्रथम निबंध ( लगभग 1000 शब्दों में ) - निम्नांकित विषय - क्षेत्रों से निबंध पूछा जा सकता है। जैसे- भारतीय ज्ञान-विज्ञान परंपरा, विकसित भारत @2047, आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना, स्वर्णिम मध्यप्रदेश, अंतरिक्ष में भारत के बढ़ते कदम, मध्यप्रदेश का गौरवशाली इतिहास, पर्यावरण, विज्ञान, धर्म-आध्यात्म, विश्व ग्राम की संकल्पना, शिक्षा में गुणवत्ता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 2020, परंपरागत कौशल आधारित व्यवसाय, आधुनिकीकरण, भूमंडलीकरण, उदारीकरण, कृत्रिम बुद्धिमता, परंपरागत खेल, सांस्कृतिक विरासत, सभ्यता एवं संस्कृति, धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन, युवा नीति, योग एवं स्वास्थ्य, ई-मार्केटिंग, ई-कॉमर्स, नेतृत्व एवं विकास, सुशासन, नौकरशाही, लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका, जनजातीय विकास, स्वदेशी, स्वभाषा, राष्ट्रीयता के विभिन्न मुद्दे, राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक समरसता, सामुदायिक जीवन, सामाजिक सरोकार, नवीनीकरणीय ऊर्जा, सतत् विकास लक्ष्य, समावेशी विकास, ग्राहक जागरुकता - आज की आवश्यकता, मादक पदार्थों का सेवन एवं दुष्प्रभाव, घरेलू हिंसा, बाह्य एवं आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे, व्यवसायगत सरलता, सोशल मीडिया का मानव जीवन पर प्रभाव, गौरवशाली भारतीय संस्कृति, वसुधैव कुटुम्बकम्, मानवीय जीवन में संस्कार और जीवन मूल्य, वन नेशन वन हेल्थ सिस्टम / पॉलिसी - 2030 |  -----------------------------------------------------------------------------------------------(अंक 50) 

2. द्वितीय निबंध - समसामयिक समस्याएँ एवं निदान (लगभग 500 शब्दों में) --------------------अंक 20

3. प्रारूप लेखन - शासकीय व अर्धशासकीय पत्र, परिपत्र (सर्क्युलर), प्रपत्र, विज्ञापन, आदेश, अंक पृष्ठांकन, अनुस्मारक ( स्मरण पत्र ) | ( लगभग - 250 शब्दों में)। ---------------------------------------------अंक 15

4. प्रतिवेदन (रिपोर्ट राइटिंग), अधिसूचना ( नोटिफिकेशन), ज्ञापन (मेमोरेण्डम) टिप्पण अंक लेखन। ( लगभग 250 शब्दों में) । ---------------------------------------------------------------------------------------अंक 15 


                                                               अंकों का कुल योग 

                                                                      अंक 100





Saturday, March 22, 2025

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम

               


                 मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम
                                                                  (2024 से प्रभावशील) 
                                                         प्रथम प्रश्न पत्र - सामान्य अध्ययन 

परीक्षा योजना:
प्रारंभिक परीक्षा (वस्तुनिष्ठ प्रकार)
प्रश्नपत्र 1: सामान्य अध्ययन - 200 अंक
प्रश्नपत्र 2: सामान्य अभिरुचि परीक्षण - 200 अंक (क्वालीफाइंग)
प्रत्येक प्रश्नपत्र की अवधि: 2 घंटे
नकारात्मक अंकन: नहीं

विस्तृत पाठ्यक्रम:

1. भारत का इतिहास 

 संकल्पना एवं विचार - प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतवर्ष, वेद, उपनिषद, आरण्यक, ब्राह्मण ग्रंथ, षड्दर्शन, स्मृतियाँ, ऋत सभा समिति, गणतंत्र, वर्णाश्रम, पुरुषार्थ, ऋण संस्कार, पंचमहायज्ञ / यज्ञ, कर्म का सिद्धांत, बोधिसत्व, तीर्थंकर। 

● 
प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत के इतिहास की प्रमुख विशेषताएँ, घटनाएँ एवं उनकी प्रशासनिक, सामाजिक तथा आर्थिक व्यवस्थाएँ। 

● भारत की सांस्कृतिक विरासत - कला प्रारूप, साहित्य, पर्व एवं उत्सव। 

● 19वीं एवं 20वीं शताब्दी में सामाजिक तथा धार्मिक सुधार आंदोलन। 

● स्वतंत्रता संघर्ष एवं भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन। 

● स्वतंत्रता के पश्चात् भारत का एकीकरण एवं पुनर्गठन।
 

2. मध्यप्रदेश का इतिहास, संस्कृति एवं साहित्य 

● मध्यप्रदेश के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाएँ, प्रमुख राजवंश। 

● स्वतंत्रता आंदोलन में मध्यप्रदेश का योगदान। 

● मध्यप्रदेश की प्रमुख कला एवं स्थापत्य कला। 

● मध्यप्रदेश की प्रमुख जनजातियाँ एवं उनकी बोलियाँ। 

● मध्यप्रदेश के प्रमुख त्योहार, लोक संगीत, लोक कलाएँ एवं लोक-साहित्य। 

● मध्यप्रदेश के प्रमुख साहित्यकार एवं उनकी कृतियाँ। 

● मध्यप्रदेश के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक पर्यटन स्थल। 

● मध्यप्रदेश में विश्व धरोहर स्थल। 

● मध्यप्रदेश के प्रमुख जनजातीय व्यक्तित्व। 

3. भारत का भूगोल 

● पर्वत, पहाड़ियाँ, पठार, नदियाँ और झीलें। 

● जलवायु घटनाएँ- अल-नीनो, ला नीना, दक्षिणी दोलन, पश्चिमी विक्षोभ, परिवर्तन के परिणाम। 

● प्राकृतिक संसाधन - वन, खनिज, जल संसाधन। 

● प्रमुख फसलें, खाद्य सुरक्षा, हरित क्रांति, दूसरी हरित क्रांति की रणनीतियाँ। 

● ऊर्जा के पारंपरिक और गैर-पारंपरिक स्रोत। 

● भारत में प्राकृतिक खतरे और आपदाएँ, भारत में प्रमुख चक्रवात। 

● जनसंख्या वृद्धि, वितरण एवं घनत्व, ग्रामीण-नगरीय प्रवास।

4. मध्यप्रदेश का भूगोल 

● वन, वनोपज, नदियाँ, पहाड़ियाँ और पठार। 

● जलवायु — ऋतुएँ, तापमान, वर्षा। 

● प्राकृतिक संसाधन - मिट्टियाँ, प्रमुख खनिज संसाधन। 

● प्रमुख फसलें, जल संसाधन, सिंचाई और सिंचाई परियोजनाएँ। 

● ऊर्जा के पारंपरिक और गैर-पारंपरिक स्रोत। 

● मध्यप्रदेश के प्रमुख उद्योग। 

● जनसंख्या वृद्धि, वितरण एवं घनत्व, नगरीकरण। 

5. भारत एवं मध्यप्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था 

● संविधान सभा। 

● संघीय कार्यपालिका, राष्ट्रपति एवं संसद। 

● सर्वोच्च न्यायालय एवं न्यायिक व्यवस्था। 

● संवैधानिक संशोधन। 

● नागरिकों के मौलिक अधिकार, कर्तव्य एवं राज्य के नीति-निदेशक सिद्धांत। 

● राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक संवैधानिक / सांविधिक आयोग एवं संस्थाएँ। 

● मध्यप्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था ( राज्यपाल, मंत्रिमंडल, विधानसभा, उच्च न्यायालय)। 

● मध्यप्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतीराज एवं नगरीय प्रशासन व्यवस्था। 

● मध्यप्रदेश में सुशासन (अभिशासन व्यवस्था)।

6. भारत एवं मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था 

● भारतीय अर्थव्यवस्था में मध्यप्रदेश की वर्तमान स्थिति। 

● मध्यप्रदेश की जनसंख्या व मानवीय संसाधनों का विकास- शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कौशल ! 

● सतत् विकास लक्ष्यों में मध्यप्रदेश की प्रगति। 

● मध्यप्रदेश में कृषि, उद्योग, एम. एस. एम. ई. एवं अधोसंरचना का विकास। 

● आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश, एक जिला एक उत्पाद (ओ.डी.ओ.पी.)। 

● मध्यप्रदेश में बौद्धिक संपदा अधिकारों (आई.पी. आर.) की प्रगति। 

● भारतीय अर्थव्यवस्था की नवीन प्रवृत्तियाँ - कृषि, उद्योग एवं सेवा क्षेत्र। 

● वित्तीय संस्थाएँ - रिज़र्व बैंक, वाणिज्यिक बैंक, सेबी, गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाएँ। 

● भारत की विदेशी व्यापार की नीतियाँ एवं जी- 20, सार्क तथा आशियान।

7. विज्ञान, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य 

● विज्ञान की प्रमुख शाखाओं का प्रारंभिक ज्ञान। 

● भारत के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान एवं उनकी उपलब्धियाँ। 

● उपग्रह एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियाँ। मानव शरीर संरचना। 

● पोषण, आहार, पोषक तत्व एवं कुपोषण। 

● अनुवांशिक रोग, सिकल सेल एनीमिया - कारण, प्रभाव, निदान एवं कार्यक्रम। 

● स्वास्थ्य नीति एवं कार्यक्रम, संक्रामक रोग, उनकी रोकथाम एवं स्वास्थ्य सूचक। 

● सतत् विकास की अवधारणा एवं एस. डी. जी.। 

● पर्यावरणीय कारक, पारिस्थितिकीय तंत्र एवं जैव-विविधता। 

● प्रदूषण, प्राकृतिक आपदाएँ एवं प्रबंधन।

8. अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं मध्यप्रदेश की समसामयिक घटनाएँ 

● अंतर्राष्ट्रीय समसामायिक घटनाएँ। 

● राष्ट्रीय समसामायिक घटनाएँ। 

● मध्यप्रदेश की समसामायिक घटनाएँ।

9. सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी 

● कंप्यूटर का आधारभूत ज्ञान। 

● इलेक्ट्रॉनिकी, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी 

● रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेन्स एवं सायबर सिक्यूरिटी। 

● ई-गवर्नेस। 

● इंटरनेट तथा सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्मस्। 

10. मध्यप्रदेश की जनजातियाँ - विरासत, लोक संस्कृति एवं लोक साहित्य 

● मध्यप्रदेश में जनजातियों का भौगोलिक विस्तार, जनजातियों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान। 

● मध्यप्रदेश की प्रमुख जनजातियाँ, विशेष पिछड़ी जनजातियाँ एवं घुमन्तू जातियाँ, जनजातियों के कल्याण के लिए      योजनाएँ। 

● मध्यप्रदेश की जनजातीय संस्कृति - परम्पराएँ, विशिष्ट कलाएँ, त्यौहार, उत्सव, भाषा, बोली एवं साहित्य। 

● मध्यप्रदेश की जनजातियों का भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान एवं राज्य के प्रमुख जनजातीय व्यक्तित्व।      मध्यप्रदेश में जनजातियों से संबंधित प्रमुख संस्थान, संग्रहालय, प्रकाशन। 

● मध्यप्रदेश की लोक संस्कृति एवं लोक साहित्य। 

                                                        द्वितीय प्रश्न पत्र - सामान्य अभिरुचि परीक्षण  

● बोधगम्यता 

● जीवन शैली, प्रतिबल। 

● संचार कौशल सहित अंतर

● तार्किक कौशल एवं विश्लेषणात्मक क्षमता

● निर्णय लेना एवं समस्या समाधान 

● सामान्य मानसिक योग्यता 

● आधारभूत संख्ययन ( संख्याएँ एवं उनके संबंध , विस्तार क्रम आदि- दसवीं कक्षा का स्तर) आँकडों का निर्वचन ( चार्ट , ग्राफ तालिका , आँकडों की पर्याप्तता आदि - दसवीं कक्षा : स्तर ) 

● हिन्दी भाषा में बोधगम्यता कौशल ( दसवीं कक्षा का स्तर)



Wednesday, March 19, 2025

मध्यप्रदेश की प्रमुख नदियाँ


                                                         
                                                           मध्यप्रदेश की प्रमुख नदियाँ 

मध्य प्रदेश से कई महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम होता है साथ ही जल संसाधनों की प्रचुरता है। 150 से अधिक बड़ी और छोटी नदियों की उपस्थिति के कारण इन्हें  मध्य प्रदेश की नदियां का घर (नदियों का मायका) कहा जाता है।"मायका" शब्द का अर्थ है "माँ का घर" या "उद्गम स्थल"। मध्य प्रदेश में कई बड़ी और छोटी नदियाँ बहती हैं जो राज्य और आसपास के क्षेत्रों के लिए जीवन रेखा का काम करती हैं।

यहाँ कुछ मुख्य कारण दिए गए हैं कि मध्य प्रदेश को नदियों का मायका क्यों कहा जाता है:

नदियों का उद्गम: नर्मदा, ताप्ती, चंबल, बेतवा, सोन और क्षिप्रा जैसी महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम मध्य प्रदेश में ही होता है।
नदियों का जाल: राज्य में नदियों का एक घना जाल फैला हुआ है, जो सिंचाई, पीने के पानी और अन्य उद्देश्यों के लिए जल संसाधन प्रदान करता है।
कृषि के लिए महत्व: ये नदियाँ मध्य प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
सांस्कृतिक महत्व: नदियों का मध्य प्रदेश की संस्कृति और परंपराओं में गहरा महत्व है, और इन्हें पवित्र माना जाता है।

मध्य प्रदेश की नदियों का वर्गीकरण:

1. उद्गम के आधार पर:
मध्य प्रदेश में उद्गम होने वाली नदियाँ: नर्मदा, चंबल, ताप्ती, बेतवा, केन, सोन, क्षिप्रा, माही, पार्वती, काली सिंध आदि।
मध्य प्रदेश से होकर गुजरने वाली नदियाँ: गंगा, यमुना, महानदी, गोदावरी (कुछ भाग) आदि।

2. प्रवाह की दिशा के आधार पर:
पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ: नर्मदा, ताप्ती, माही।
उत्तर की ओर बहने वाली नदियाँ: चंबल, बेतवा, केन, सिंध, पार्वती, काली सिंध। ये नदियाँ अंततः यमुना या गंगा में मिल जाती हैं।
पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ: सोन, महानदी। ये नदियाँ गंगा या बंगाल की खाड़ी में मिल जाती हैं।
दक्षिण की ओर बहने वाली नदियाँ: वेनगंगा, वर्धा, पेंच, कान्हन। ये नदियाँ गोदावरी नदी प्रणाली का हिस्सा हैं।

                                              मध्यप्रदेश की प्रमुख नदियाँ (विस्तार से):



1. नर्मदा नदी:

➤मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण नदी, जिसे "मध्य प्रदेश की जीवन रेखा" कहा जाता है और भारत की 5 वी सबसे बड़ी नदी है। 
                                                                        
उद्गम: अमरकंटक (अनूपपुर जिला)
प्रवाह दिशा: पश्चिम                                                                                 
अवसान स्थल: खंभात की खाड़ी (अरब सागर)
कुल लंबाई: 1312 कि.मी. (मध्य प्रदेश में 1077 कि.मी.)
नर्मदा नदी: मध्यप्रदेश ,गुजरात और महाराष्ट्र से होकर बहती है 
सहायक नदियाँ:
★इसकी 41 सहायक नदिया है,22 बाए तरफ से तथा 19 दाए तरफ से बहती है 
दाहिनी ओर से प्रमुख सहायक नदियाँ हैं- हिरन, तेंदोरी, बरना, कोलार, मान, उरी, हटनी और ओरसांग।
प्रमुख बायीं सहायक नदियाँ हैं- बर्नर, बंजार, शेर, शक्कर, दूधी, तवा, गंजाल, छोटा तवा, कुंडी, गोई और कर्जन।
विशेषताएँ:
★यह एक भ्रंश घाटी (Rift Valley) से होकर बहती है, जिसके कारण डेल्टा नहीं बनाती बल्कि यह एश्चुरी का निर्माण करती है।
★नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध, इंदिरा सागर बांध (ओंकारेश्वर बांध) और महेश्वर बांध अवंतीबाई(जबलपुर),इंदिरा सागर(खंडवा),चंद्रशेखर(अलीराजपुर),सरदार सरोवर(गुजरात) जैसी प्रमुख परियोजनाएँ स्थित हैं।
★नर्मदा नदी के अन्य नाम -भारत की ह्रदय रेखा,म.प्र व गुजरात की जीवन रेखा,म.प्र की गंगा,मैकलसुता,नामोदस,रेवा,शंकरी आदि।
★सर्वौच्च न्यायलय द्वारा 2017 में नर्मदा नदी को जीवित नदी का दर्जा दिया गया है। 
★नर्मदा नदी पर गौरीघाट(जबलपुर),सेठानी घाट (होशंगाबाद),बारमान घाट(नरसिंगपूर गाडरवाड़ा-यहाँ पर 13 दिनों के लिए मकर सक्रांति के अवसर पर बरमान का मेला आयोजिय किया जाता है )
★नर्मदा नदी पर महेश्वर घाट स्थित है जिसे देवी अहिल्याबाई जी द्वारा बनवाया गया था 
★खरगौन जिले के बड़वाह में नर्मदा नदी पर महाशीर मछली प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया है 
★11 दिसंबर 2016 अमरकंटक से नर्मदा सेवा यात्रा सुरू की गयी जो 15 मई 2027 को समाप्त हुई 
नर्मदा नदी को खुशियों की नदी कहा जाता है 
★31अक्टूबर 2018 को गुजरात में नर्मदा नदी के तट पर दुनियाँ की सबसे ऊंची प्रतिमा सरदार बल्लभ भाई पटेल जी की "स्टेच्यू ऑफ यूनिटी"का अनावरण किया गया जिसकी ऊंचाई 182 मीटर है  (वास्तुकार-राम सुतार) 

2. चंबल नदी:

➤म.प्र की दूसरी सबसे बड़ी नदी 
उद्गम: जानापाव पहाड़ी, महू (इंदौर)                                                 
प्रवाह दिशा: उत्तर-पूर्व
अवसान स्थल: यमुना नदी (उत्तर प्रदेश)
कुल लंबाई: 965 कि.मी.
विशेषताएँ:
★मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा बनाती है।
★अपने बीहड़ों (Ravines) के लिए जानी जाती है।
★इसकी सहायक नदियाँ क्षिप्रा, काली सिंध, पार्वती, बनास आदि हैं।
★गांधी सागर बांध(मंदसौर म.प्र),जवाहर सागर (कोटा राजस्थान) और राणा प्रताप सागर(चित्तौड़गढ़ राजस्थान) बांध इस पर स्थित हैं।
★चम्बल नदी पर ही चूलिया जलप्रपात (राजस्थान) है।
चम्बल नदी के अन्य नाम -चर्मावती,कामधेनु,धर्मवती और रतिदेव की कीर्ति।
★चम्बल नदी पर घड़ियाल अभ्यारण्य मुरैना में है साथ इस नदी पर डाल्फिन संरक्षण किया जाता है।
★चम्बल नदी एलवियम चट्टान (भिंड,मुरैना) को काटकर गहरे खड्ड बनाती है जिसे रबीन्स कहते है।  
★राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के त्रि-जंक्शन पर चंबल नदी के तट पर स्थित है। यह गंभीर रूप से संकटग्रस्त घड़ियाल, रेड क्राउन्ड रूफ टर्टल और संकटग्रस्त गंगा नदी डॉल्फिन के लिये प्रसिद्ध है।

3. ताप्ती नदी:

➤ताप्ती नदी भी नर्मदा नदी के समान पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है 
उद्गम: मुल्ताई (बैतूल जिला)
प्रवाह दिशा: पश्चिम                                                                           
अवसान स्थल: अरब सागर(सूरत के निकट)
➤कुल लंबाई: 724 कि.मी.(मध्यप्रदेश मे 333 कि.मी) 
➤विशेषताएँ:
★नर्मदा नदी के समानांतर बहती है।
★यह भी एक भ्रंश घाटी से होकर गुजरती है जिस कारण डेल्टा नहीं बनाती बल्कि यह एश्चुरी का निर्माण करती है।
★यह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात राज्यों से होकर बहती है।
ताप्ती नदी के अन्य नाम -तापी,सूर्य पुत्री,सूरसुता। 
★ताप्ती नदी सतपुड़ा पर्वत व अजंता पर्वत के मध्य प्रवाहित होती है। 
★ताप हरने वाली ताप्ती नदी को विष्णुपुराण में ‘सहस भादो भदवा’ कहा गाया है।
★इसकी सहायक नदियाँ -पूर्णा,सिवा,बोरी।

4. बेतवा नदी:

➤बेतवा को म.प्र की गंगा (प्रदूषण के अनुसार) कहा जाता है 
इसका पौराणिक नाम -वैत्रवती है                                                    
उद्गम: विंध्य पर्वत श्रृंखला
प्रवाह दिशा: उत्तर-पूर्व
अवसान स्थल: यमुना नदी (हमीरपुर,उत्तर प्रदेश)
कुल लंबाई: 480 कि.मी.(मध्यप्रदेश मे 380 कि.मी.है) 
➤विशेषताएँ:
★इसे "बुंदेलखंड की जीवन रेखा" कहा जाता है।
★राजघाट बांध इस पर स्थित है।
★इसकी सहायक नदियाँ- बीना नदी (यह बेतवा की सबसे बड़ी सहायक नदी है),केन, धसान नदी,हलाली नदी।
★बेतवा नदी पर कई महत्वपूर्ण बांध स्थित हैं, जिनका उपयोग सिंचाई और बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। इनमें से कुछ प्रमुख बांध निम्नलिखित हैं: माताटीला बांध(निर्माण 1958),राजघाट बांध,परीक्षा बांध।
★देवगढ़ (उ.प्र.) इसी नदी के किनारे स्थित है, जिसे  ‘बेतवा का आइसलैंड ’ कहा जाता  है। 

5. केन नदी:

➤उद्गम: कैमूर पहाड़ियाँ (कटनी)
➤प्रवाह दिशा: उत्तर-पूर्व
अवसान स्थल: यमुना नदी (बांदा,उत्तर प्रदेश)                                       
➤कुल लंबाई: 427 कि.मी.(मध्यप्रदेश मे 292 कि.मी.है)
➤विशेषताएँ:
★अपनी गहरी घाटियों और सुंदर झरनों के लिए जानी जाती है।
★मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा इसे म.प्र की सबसे सुंदर नदी का दर्जा दिया गया है।
★भारत की पहली नदी लिंक परियोजना केन-बेतवा लिंक परियोजना है(2005 मे)।
★पांडव जलप्रपात (पन्ना) इसी नदी पर स्थित है।
★केन नदी पर स्थित प्रमुख बांध इस प्रकार हैं: गंगऊ बांध ,रणगढ़ बांध,बरियारपुर बांध।
★केन नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ निम्नलिखित हैं: सोन नदी (सबसे बड़ी सहायक नदी),ब्यास नदी ,उर्मिल नदी ,श्यामा नदी,कल्याण नदी आदि।

6. सोन नदी:

➤उद्गम: अमरकंटक सोनमूडा के पास
➤प्रवाह दिशा: उत्तर-पूर्व
अवसान स्थल: गंगा नदी (बिहार मे पटना के निकट)
➤कुल लंबाई: 780 कि.मी.
➤विशेषताएँ:
★गंगा की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी है।
★इसे स्वर्ण नदी भी कहा जाता है।
★सोन नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ: रिहंद नदी (सबसे बड़ी सहायक नदी है), रिहंद नदी ,उत्तरी कोयल नदी ,गोपद नदी ,कन्हर नदी,बनास नदी।
★सोन नदी पर स्थित प्रमुख बांध-बाणसागर बांध (मध्य प्रदेश के शहडोल जिले) 🠂 बाणसागर बांध का नाम बाणभट्ट के नाम पर रखा गया है, जो सातवीं शताब्दी के संस्कृत विद्वान थे,इंद्रपुरी बैराज (बिहार के रोहतास जिले)
★सोन नदी पर स्थित प्रमुख परियोजनाएँ-बाणसागर परियोजना,सोन नहर प्रणाली (Sone Canal System)
 🠂यह बिहार में स्थित एक पुरानी नहर प्रणाली है, जो सोन नदी से पानी प्राप्त करती है। इस प्रणाली का निर्माण ब्रिटिश काल में किया गया था और इसका उद्देश्य रोहतास और आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई करना है। इंद्रपुरी बैराज इस प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रिहंद परियोजना हालांकि रिहंद बांध रिहंद नदी पर बना है (जो सोन नदी की सहायक नदी है), फिर भी यह सोन नदी बेसिन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 

7. क्षिप्रा नदी:

➤उद्गम: काकरी बरडी पहाड़ी (इंदौर)
➤प्रवाह दिशा: उत्तर
अवसान स्थल: चंबल नदी(कोटा के समीप)
➤कुल लंबाई: 195 कि.मी.
➤विशेषताएँ:
★उज्जैन शहर इसी नदी के किनारे स्थित है, जहाँ कुंभ मेला लगता है(प्रत्येक 12 साल मे)।
★इसे मालवा की गंगा कहा जाता है।
★इसी के किनारे महाकालेश्वर मंदिर (उज्जैन) स्थित है।
★इस नदी पर रामघाट स्थित है।
★इसकी सहायक नदी -खान नदी 

8. माही नदी:

➤उद्गम: विंध्याचल पर्वत
➤प्रवाह दिशा: पश्चिम
अवसान स्थल:खंभात की खाड़ी (गुजरात,अरब सागर)
कुल लंबाई: 583 कि.मी.
➤विशेषताएँ:
★यह नदी कर्क रेखा को दो बार काटती है इस दौरान यह उल्टे U अकार मे बहती है।
★इसे आदिवासियों की गंगा कहा जाता है।
माही नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ -सोम नदी,जाखम नदी ,अनास नदी ,पानम नदी 
माही नदी पर स्थित प्रमुख परियोजनाएँ -माही बजाज सागर परियोजना (यह माही नदी पर स्थित सबसे महत्वपूर्ण परियोजना है यह राजस्थान और गुजरात राज्यों की संयुक्त परियोजना है),माही बजाज सागर बांध (राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में), कागदी पिकअप वियर ,कडाणा बांध (गुजरात में माही नदी पर)

नदियों का महत्व:

कृषि: सिंचाई के लिए पानी प्रदान करती हैं।
पेयजल: लाखों लोगों के लिए पेयजल का स्रोत हैं।
जल विद्युत: बिजली उत्पादन के लिए जल विद्युत परियोजनाएँ स्थापित हैं।
➤परिवहन: कुछ नदियाँ जलमार्ग के रूप में उपयोग की जाती हैं।
➤मत्स्य पालन: मछली पालन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
➤पर्यटन: नदियों के किनारे स्थित पर्यटन स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

नदियों से जुड़ी समस्याएँ:

प्रदूषण: औद्योगिक कचरे और सीवेज के कारण नदियों का प्रदूषण एक गंभीर समस्या है।
➤जल की कमी: जनसंख्या वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के कारण जल की कमी बढ़ रही है।
➤अवैध खनन: नदियों में अवैध खनन से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है।
➤बांधों का निर्माण: बांधों के निर्माण से नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा आ रही है।

नदियों के संरक्षण के उपाय:

प्रदूषण नियंत्रण: नदियों में कचरा डालने पर रोक लगाना और औद्योगिक कचरे का उपचार करना।
➤जल संरक्षण: वर्षा जल संचयन और सिंचाई के तरीकों में सुधार करना।
➤अवैध खनन पर रोक: नदियों में अवैध खनन को रोकना और पर्यावरण नियमों का सख्ती से पालन करना।
➤नदी पुनरुद्धार परियोजनाएँ: नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए विभिन्न परियोजनाएँ शुरू करना।


                                                      

नीति आयोग (NITI Aayog)

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